20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

किसी ने पिकनिक मनाई, कोई मूवी देखने गया, इस तरह भी लिया आनंद

फ्रेंडशिप-डे: रिमझिम बारिश ने दोगुना किया मजा

2 min read
Google source verification
Friendship Day Picnic forbidden Movie seen

Friendship Day Picnic forbidden Movie seen

सागर. शहर में रविवार को फ्रेंडशिप-डे पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। किसी ने फ्रेंड्स के साथ पिकनिक मनाई तो किसी ने मूवी देखकर एन्जॉय किया। लाखा बंजारा झील में क्रूज की सवारी का भी लोगों ने जमकर लुत्फ उठाया। साथ ही राजघाट, राहतगढ़ वाटर फॉल और गढ़पहरा सहित अन्य स्थानों पर भी लोग एन्जॉय करने पहुंचे। दोपहर में हल्की बारिश के बाद लोग शाम को होटल और रेस्टोरेंट में भी पहुंचे।
खूब की खरीदारी
फ्रेंडशिप-डे को यादगार बनाने बाजार में लोगों ने अपने दोस्तों के लिए खूब खरीदारी की। सबसे ज्यादा फोटो फ्रेम, फ्रेंडशिप बेल्ट, बुक्स, टेडी बियर के साथ गल्र्स के लिए विशेष आइटम की डिमांड रही।

फ्रेंडशिप डे पर रविवार को सुबह से ही गलियारों में दोस्तों ही चहलकदमी देखी गई। हर जगह पर दोस्त एक-दूजे को मित्र दिवस की शुभकमनाएं देते नजर आए। अलग-अलग में दोस्तों को शुभकामनाएं प्रेषित करने का सिलसिला दिनभर जा रहा। इधर बड़ी संख्या में दोस्त होटल, पार्क, पिकनिक स्पॉट, मंदिरों में मस्ती के मूड में नजर आए। इस दौरान हाथों में फ्रेंडशिप बैंड और उपहार भी दोस्तों ने थमाएं। इस मौके पर कुछ ऐसे दोस्तों से भी मुलाकात हुई, जिनका जीवन ही दोस्ती पर क्रेंदित था। किसी फिल्मी स्टोरी से मिलती-जुलती इनकी कहानी थी, जिसे उन्होंने बयां किया।

प्यार में बदल गई दोस्ती
अगरबत्ती डीलर राहुल चउदा बताते हैं कि पत्नी शिल्पी से उनकी पहली बार मुलाकात एक रिश्तेदार की शादी में हुई थी। यहीं दोनों में दोस्ती हुई। फिर चार साल बाद दोस्ती का रिश्ता प्यार में बदल गया और दोनों ने शादी कर ली। राहुल बताते हैं कि हर साल फ्रेंडशिप-डे उनके लिए खास होता है। जैसे-जैसे वर्ष गुजरते जा रहे हैं, वैसे-वैसे प्यार के साथ दोस्ती गहराती जा रही है।

दोस्ती के लिए छोड़ी नौकरी
शहर के बाटु दुबे, रानू यादव, सुरेन्द्र ठाकुर का नाता 26 साल से है। तीनों आज अलग-अलग व्यापार और नौकरी कर रहे हैं लेकिन इनकी दोस्ती अटूट है। एक ही स्कूल में पढ़ाई करने के बाद तीनों ने पहले ही शहर के लिए कुछ करने का मन बना लिया था। बाटु दुबे ने बताया कि पढ़ाई के बाद नौकरी के लिए इंदौर और पुणे पहुंच गए लेकिन दोस्तों के लिए नौकरी भी छोड़ दी। अब यहां सभी मिलकर गौसेवा का काम कर रहे हैं।