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VIDEO यहां गिरा था गौरी का दांत, मार्कण्डेय का है साधना स्थल

पहाड़ पर हैं शिला लेख, बौद्ध स्तूप, इतिहासकारों के है शोध का विषय

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Gauridant Gauri Teeth Markandeya sadhana site Buddhist Stupa Ranger

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पंकज शर्मा
सागर/ रहली। सिद्व क्षेत्र रानगिर से जंगल जाने पर करीब 5 किमी दूर दक्षिण वन मंडल परिक्षेत्र में प्रकृति की गोद में स्थित है गौरीदंत धाम। यहां मां गौरी की पाषाण प्रतिमा करीब सात सौ फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजित है।

दुर्गम रास्ता होने के बाद भी यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। मंदिर के आसपास शिलालेख हैं जो आज भी इतिहासकारों की जिज्ञासा का विषय बने हुए हैं। इन्हें देखने से ये प्रतीत जरूर होता है कि यह क्षेत्र काफी पुराना है। करीब 20 वर्षो से यहां माता की पूजा कर रहे रामकुमार पंडा बताते है कि बचपन से इस क्षेत्र को ऐसे ही देखा है। मेरे पूर्वज यहां पूजा करते थे और अब ये दायित्व मुझे मिला है।

ऐसे पड़ा गौरी दंत नाम-माता पार्वती जब सती हुई तो भगवान शंकर शोक में डूब गए। वे उनका शव लेकर तीनों लोकों में घूमते रहे। शिव को इतना शोक में डूबा देखकर भगवान विष्णु ने सोचा कि इस तरह शिव का शोक में डूबना संसार के लिए उचित नहीं। इसके बाद बाद भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र चलाकर माता पार्वती के शव को नष्ट किया। इस क्षत-विक्षत शव का एक दांत यहां गिरा जिसे गौरी दंत कहा जाना लगा। आज यह माता के शक्ति पीठ के रूप में पूजा जाता है। कहा जाता है साधक यहां से चरम अवस्था की अनुभूति सहज ही प्राप्त कर लेते हैं।

रहस्यमयी गुफा एवं बौद्ध स्तूप- गौरीदंत की पहाड़ी पर मंदिर के सामने पहाडी के बीच में से एक रहस्यमयी गुफा का रास्ता गया है जिसमें अंदर प्रवेश के लिए दो लोहे कि सीढिय़ां लगाई गई हैं लेकिन आज भी यह गुफा अबूझ बनी हुई है। यहां हनुमान जी कि प्रतिमा भी स्थापित है जिसके ठीक बाजू से एक और संकरा रास्ता नीचे कि ओर जाता है। पंडा रामकुमार बताते है कि आज तक इस गुफा में कोई नही पहुंच सका जिसने भी अंदर जाने कि कोशिश कि वह कभी वापस नही लौटा।

पहाड़ों के बीच में बनी यह गुफा लोगों में चर्चा का विषय है ऐसा माना जाता है कि आज भी वहां मातारानी की प्रतिमा है और इसी गुफा में मार्कण्डेय मुनि ने तपस्या की थी। पहाड़ी के ऊपर बौद्ध स्तूप एवं पाली लिपि में शिला लेख हैं। मंदिर के पीछे कामदेव एवं रति कि प्रतिमा स्थित है जो यहां कि ऐतिहासिकता कि प्रमाण हैं। गौरीदंत सिद्ध क्षेत्र का यदि विकास किया जाये तो यह भी एक धार्मिक पर्यटक स्थल विकसित किया जा सकता है।