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बेटे के एडमिशन के लिए दर-दर भटक रहा, तख्ती लेकर लगा रहा है गुहार

एक ओर आर्थिक तंगहाली, वहीं अपने बेटे के एडमिशन के लिए दर-दर भटक रहा पिता। नन्हीं बेटी की आंखों में भी आंसू। पूरा परेशान परिवार। बेटे का स्कूल में एडमिशन कराने भीख मांगने के लिए भी तैयार। यह कहानी सदर क्षेत्र में रहने वाले वीरेंद्र यादव की।

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सागर

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Reshu Jain

Jul 16, 2024

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स्कूल प्रबंधन एडमिशन के नाम पर की पैसों की मांग, अब अधिकारियों से लगा रहे गुहार

सागर. एक ओर आर्थिक तंगहाली, वहीं अपने बेटे के एडमिशन के लिए दर-दर भटक रहा पिता। नन्हीं बेटी की आंखों में भी आंसू। पूरा परेशान परिवार। बेटे का स्कूल में एडमिशन कराने भीख मांगने के लिए भी तैयार। यह कहानी सदर क्षेत्र में रहने वाले वीरेंद्र यादव की। जो बेटे को स्कूल में दाखिला ना मिलने की वजह से सोमवार को कलेक्टर कार्यालय के सामने पहुंच गए। यहां बेटी और बेटा के साथ हाथ में तख्ती लेकर अधिकारियों से एडमिशन दिला दो की गुहार लगा रहे थे। दरअसल वीरेंद्र यादव की बेटी शासकीय स्वामी विवेकानंद माध्यमिक विद्यालय सदर में पहली कक्षा में पढ़ाई करती है। वीरेंद्र की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने की वजह बेटे को भी इसी स्कूल में दाखिला दिलाना चाहते हैं।

यह स्कूल कैंट बोर्ड द्वारा संचालित की जाती है। बेटे को एलकीजे कक्षा में दाखिला देने से स्कूल प्रबंधन ने मना करा दिया और एडमिशन के लिए पांच रूपए की मांग की। वीरेंद्र के पास पांच हजार रुपए की राशि नहीं होने वे भीख मांगने मजबूर हो गए। भीख मांगने के लिए उन्होंने बेटी की छुट्टी के लिए भी आवेदन स्कूल प्रबंधन को दिया है। आवेदन में लिखा है कि बेटी के साथ भीख मंगाना है। बेटी को स्कूल से छुट्टी देने की कृपा करें।

एक साथ पढ़े बेटा-बेटी
वीरेंद्र यादव ने बताया कि कोरोना के पहले उनके पास 8 हजार रुपए माह की नौकरी थी। पूरा परिवार खुश था। अब नौकरी नहीं है। तीन से चार रुपए का काम एक माह में करता हूं। जिससे परिवार का गुजारा नहीं होता है।
स्वामी विवेकानंद माध्यमिक विद्यालय में बेटी पढ़ाई करती है। जिससे में रोजाना साइकल से लेने और छोडऩे जाता हूं। यदि बेटे का भी उसी स्कूल में दाखिला हो गया तो दोनों को एक साथ स्कूल लेकर जाया करूंगा। निजी स्कूल में पढ़ाने पैसे नहीं है। सरकारी स्कूल में पूरे वर्ष की पढ़ाई नि:शुल्क हैं, लेकिन स्कूल प्रबंधन द्वारा एडमिशन देने के लिए 5 हजार रुपए की मांग की जा रही है। मेरे पास 5 हजार रुपए नहीं है। इतने पैसे होते तो निजी स्कूल में बेटा का दाखिला करा लेता।

वर्शन
एडमिशन के लिए आवेदन आया था, लेकिन स्कूल में टेस्ट के बाद दाखिला दिया जाता है। हम बगैर टेस्ट के भी दाखिला देने तैयार थे और 1 दिन इंतजार के लिए कहा था। एडमिशन के लिए पैसों की कोई मांग नहीं की गई।
मृदुला तिवारी, प्राचार्य स्कूल