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दुनिया से चले गए, लेकिन 15 जिंदगियों को रौशन कर गए, अब परिजन को तसल्ली कि उनके अपनों ने फैलाया उजाला

बीएमसी के नेत्र रोग विभाग में 10 नेत्र दान दाताओं के परिजनों का हुआ सम्मान सागर . नेत्र दान से जिंदगियों को रौशन किया जा सकता है। सागर में ऐसा हो भी रहा है। बीते एक साल में 10 लोगों की मृत्यु के बाद उनकी आंखें बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग को दान की […]

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सागर

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Nitin Sadaphal

Sep 09, 2025

बीएमसी के नेत्र रोग विभाग में 10 नेत्र दान दाताओं के परिजनों का हुआ सम्मान

सागर . नेत्र दान से जिंदगियों को रौशन किया जा सकता है। सागर में ऐसा हो भी रहा है। बीते एक साल में 10 लोगों की मृत्यु के बाद उनकी आंखें बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग को दान की गईं। इन आंखों ने 15 जिंदगियों में फिर उजाला कर दिया। इन नेत्र दाताओं के परिजन का सम्मान किया गया।

डीन डॉ. पीएस ठाकुर ने समाजसेवियों से आग्रह किया कि नेत्र दान के लिए अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करना चाहिए। बीएमसी में कॉर्निया प्रत्यारोपण की सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध है। कॉर्निया प्रत्यारोपण एक जटिल सर्जरी है। हमने अपने डॉक्टर्स का भोपाल में प्रशिक्षण कराया और उपकरण जुटाए हैं। आई बैंक इंचार्ज डॉ. सारिका चौहान ने कहा कि नेत्र दान पखवाड़ा 25 अगस्त से 8 सितंबर प्रति वर्ष चलाया जाता है। नुक्कड़ नाटक, पोस्टर, सर्वे के माध्यम से लोगों को नेत्र दान के लिए प्रेरित करते हैं।

हादसे में इकलौता भतीजे को खोया, लेकिन उसकी आंखें दुनिया देख रहीं हैं- संतोष सिंह

गोपालगंज में 8 व 9 नवंबर 2024 की रात मेरे भतीजे की कार बिजली के खंभे से टकरा गई। हादसे में मेरे इकलौते भतीजे 21 वर्षीय अजेंद्र सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। यह खबर जब मुझ तक पहुंची तो मेरे होश उड़ गए। परिवार सहित पूरे खानदान में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अजेंद्र के जाने के बाद उसकी कमी तो पूरी नहीं हो सकती लेकिन तसल्ली है कि उसकी आंखें दुनिया देख रहीं हैं। हादसे की रात ही डीन डॉ. पीएस ठाकुर की प्रेरणा से मैंने भतीजे का नेत्रदान करवा दिया था। डॉ. प्रवीण खरे, डॉ. सारिका चौहान, डॉ. अंजलि विरानी पटेल, डॉ. इतिशा, डॉ. आदेश, डॉ. आयुषी की मदद से बेटे की दोनों कॉर्निया सुरक्षित रख लिया। 4 दिन बाद दोनों कॉर्निया दो अलग-अलग मरीजों को ट्रांसप्लांट किए गए। यह भावनाएं स्व. अजेंद्र सिंह के बड़े पिता संतोष सिंह ने नेत्र रोग विभाग के सम्मान समारोह के दौरान व्यक्त कीं।

टीस भी उठी...नियम बाधा नहीं बनता तो हम अपनों की आंखें ही निहार लेते

कार्यक्रम में आलोक अग्रवाल, विनोद गुप्ता, प्रीति सिंह, मनोहर चौरसिया सहित अन्य नेत्र दान दाताओं के परिवार के लोग भी पहुंचे। सभी ने भावुक होकर कहा कि नेत्र दान के बाद उनके परिजन तो इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी आंखें आसपास देख रहीं हैं। हमारी इच्छा होती है कि जिस मरीज को यह कॉर्निया ट्रांसप्लांट की गईं हैं हम उस मरीज से मिलें, लेकिन गाइडलाइन के अनुसार यह बताया नहीं जाता कि किस मरीज को कॉर्निया लगाई गई है। बीएमसी में यह प्रक्रिया बेहद गोपनीय रहती है।

15 कॉर्निया का सफल प्रत्यारोपण, कुछ शोध के लिए रखीं

नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण खरे ने बताया कि बीएमसी में एक साल पहले शुरू हुई कॉर्निया ट्रांसप्लांट की सुविधा के बाद ऋषभ बडक़ुल, जगदीश प्रसाद अग्रवाल, अजेंद्र सिंह, अरुण गोदरे, चम्पा जैन, शांति गुप्ता, सीताराम चौरसिया, ज्ञानचंद पिंजवानी, केदारनाथ केसरवानी, गुलाबचंद जैन कुल 10 लोगों का नेत्रदान हुआ। 20 कॉर्निया में से 15 जरूरतमंद मरीजों में सफल ट्रांसप्लांट की गईं। कुछ कॉर्निया शोध कार्य में भी इस्तेमाल किए गए हैं।

पहले भोपाल भेजनी पड़तीं थी कॉर्निया अब मेडिकल कॉलेज में इसकी सुविधा

सर्जन डॉ. अंजली विरानी पटेल ने कहा कि डीन डॉ. पीएस ठाकुर के प्रयासों से बीएमसी में कॉर्निया ट्रांसप्लांट की सुविधा क्षेत्र के लिए बेहद उपयोगी है। इसके पहले दान में मिलीं कॉर्निया भोपाल के हमीदिया भेजनी पड़तीं थीं। संभाग में हर साल 125 से अधिक मरीजों को कॉर्निया की आवश्यकता पड़ती है, लेकिन उन्हें कभी हमीदिया या अन्य जगह नि:शुल्क कॉर्निया नहीं मिल पातीं थीं। बीएमसी में अब यह सुविधा होने से क्षेत्र के लोगों को इसका फायदा हो रहा है। दान में मिलीं कॉर्निया से यहां के लोग ही लाभान्वित हो रहे हैं।

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