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अप्रेल 2024 से जनवरी 2025 तक संभाग में 168 प्रसूताओं की मौत के आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के एचएमआइएस पोर्टल पर दर्ज हुए हैं। संभाग में सबसे ज्यादा सागर जिले में 46 और छतरपुर में 36 महिलाओं की मौत हुई है, कुछ महिलाओं ने प्रसव के समय तो कुछ केस प्रसव के बाद बिगड़े। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इन मौतों का विश्लेषण किया। अधिकारियों-कर्मचारियों व परिजनों की जिम्मेदारी तय की, वहीं अच्छा कार्य करने वाले कर्मचारियों को सम्मानित भी किया। मौतों पर 3 प्रमुख गैप सामने आए हैं, जिसमें परिजनों के बार-बार अस्पताल बदलने, जांचों में असमानता और समय पर खून न मिलने जैसे गैप शामिल हैं। 40 प्रतिशत केस में महिलाओं की जान बचाई जा सकती थी।
3 मामले ऐसे आए जहां परिजन मरीज को एक से दूसरी अस्पताल ले जाते रहे, एक जगह इलाज नहीं कराया। ढाना की एक महिला इंदौर में अस्पताल बदलती रही, 39 किग्रा वजन व ऑर्गन फेलियर से मां की मौत हुई।
मेडिकल कॉलेज में ब्लड मिलने में देरी से समय पर ऑपरेशन नहीं हो पाए, दो-तीन प्रसूताओं की मौत हुई। बीएमसी में ही ब्लड चढ़ाते-चढ़ाते एक महिला की हालत बिगड़ी और अंत में उसकी मौत हुई।
हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर सहित अन्य जांचों में अलग-अलग रिपोर्ट आने पर इलाज प्रभावित हुआ, एक-दो केस में महिलाओं की मौत हुई।
दमोह जिले के हटा की एक महिला सफाई कर्मी ने 365 दिन में से एक भी दिन अवकाश नहीं लिया, जिससे स्वास्थ्य अधिकारियों ने सम्मानित किया। इसके अलावा लेबर रूम के डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ को प्रोत्साहित करने सम्मान व इनाम दिया गया।
46- सागर
38- छतरपुर
36- दमोह
27- पन्ना
21- टीकमगढ़
दो दिवसीय प्रशिक्षण में प्रसूताओं की मौत के कारणों को खंगाला गया, संभाग के ग्राउंड लेबल के डॉक्टर्स को इसमें शामिल किया गया, भोपाल से भी कॉर्डिनेटर आए हैं। क्षेत्र में मातृ-मृत्यु दर कम करने हम जिम्मेदारी भी तय कर रहे हैं। अच्छा कार्य करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहित भी कर रहे हैं।
डॉ. ज्योति चौहान, क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं।
Published on:
05 Mar 2025 05:10 pm
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