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संभाग में 61 में से 19 संजीवनी क्लीनिक बंद चल रहीं हैं। भवन, डॉक्टर्स, स्टाफ के अभाव में इन क्लीनिक पर ताले लगे हैं। यह सेंटर यदि प्रतिदिन खुलते, तो रोज करीब 2 हजार लोगों को उनके ही मोहल्ले में नि:शुल्क इलाज मिल जाता। सबसे ज्यादा संजीवनी क्लीनिक सागर जिले में चल रहीं हैं, लेकिन यहां भी 3 सेंटरों के लिए भवन की व्यवस्था नहीं है, जो संचालित हो रहीं हैं, उनमें डॉक्टर्स नहीं टिकते। डॉक्टर्स की व्यवस्था जुटाने में स्वास्थ्य अधिकारी भी परेशान हैं। पन्ना जिले की हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक है, क्योंकि यहां 12 में से एक भी सेंटर चालू नहीं हो पाया है। सरकार की मंशा थी कि मोहल्लों में यह सेंटर शुरू होंगे, तो वायरल फीवर व रुटीन चेकअप जैसी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए लोगों को उनके घर के पास ही नि:शुल्क इलाज मिल जाता और मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल व निजी क्लीनिक के उन्हें चक्कर नहीं लगाने पड़ते।
निजी अस्पतालों में मोटी फीस चुकानी पड़ती है।संजीवनी क्लीनिक में 320 प्रकार की दवाएं फ्री रहती हैं, इसलिए दवा पर भी मरीजों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। संजीविनी क्लीनिक पर अधिकांश मजदूर वर्ग के लोग पहुंचते हैं, जो अपने मोहल्ले में अस्पताल जाते हैं, तो उनके समय की बचत होती है, जबकि बड़ी अस्पताल जाने पर पूरे दिन की मजदूरी का नुकसान होता है।
दो साल पहले शासन ने सागर जिले के लिए 19, छतरपुर व पन्ना में 7-7, दमोह में 6, टीकमगढ़ में 3 और निवाड़ी में एक नई संजीवनी क्लीनिक स्वीकृत की गईं थीं, जिसमें से सिर्फ सागर जिले में ही 19 में से 16 संजीवनी क्लीनिक चालू कीं हैं। 8 पहले से संचालित हो रहीं थीं। वहीं पन्ना में 5 पुरानी के साथ 7 नई में से कोई भी चालू नहीं है। यही हालत निवाड़ी जिले की भी है। दमोह व टीकमगढ़ जिले में नई और पुरानी मिलाकर सभी स्वीकृत क्लीनिक चालू हैं, लेकिन यहां भी डॉक्टर्स का टोटा बना रहता है।
अधिकारियों की माने तो इन संजीवनी क्लीनिक में बॉन्ड पर तैनात किए जाने वाले डॉक्टर्स को महज 59 हजार रुपए स्टाइपेंड दिया जाता है। इन डॉक्टर्स को जब उचित अवसर मिलता है, तो वह प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में चले जाते हैं, जहां उन्हें 85 हजार रुपए से अधिक वेतन व अन्य सुविधाएं मिलती हैं। इसलिए बार-बार पदस्थापना के बाद इन सेंटरों पर डॉक्टर्स का अभाव बना रहता है।
जिला स्वीकृत संचालित
सागर 27 24
पन्ना 12 0
दमोह 8 8
छतरपुर 10 7
टीकमगढ़ 3 3
निवाड़ी 1 0
संभाग में पन्ना जिले में अभी एक भी संजीवनी क्लीनिक चालू नहीं है, सागर में तीन के भवन नहीं होने के कारण शुरू नहीं हो पाईं हैं। ज्यादा से ज्यादा संजीवनी क्लीनिक शुरू करने के प्रयास हैं। स्वीकृत क्लीनिक के लिए जगह, टेंडर में क्या दिक्कतें हैं, उन्हें जल्द हल किया जाएगा। बॉन्ड डॉक्टर्स का वेतन बढ़ाने को लेकर हमने बीते दिन सागर आए स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल से भी चर्चा की है।
- डॉ. ज्योति चौहान, क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं।
Published on:
03 Mar 2025 04:47 pm
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