
ICU unit will be rescued after 10 months
सागर. १० महीने से बंद जिला अस्पताल के आईसीयू के जीर्णोद्धार को लेकर प्रबंधन अब हरकत में आया है। १० बिस्तर वाले इस यूनिट के रिनोवशन का काम शुरू कर दिया गया है। अभी यहां पर पार्टीशन की व्यवस्था थी। टॉयलेट और फ्लोरिंग की मरम्मत का काम शुरू किया जाएगा। इसमें करीब १० लाख रुपए खर्च होंगे। १ जून से लागू हुए मर्जर के बाद यह यूनिट बंद कर दी गई थी। कलेक्टर भी इस बीच कई बार इस यूनिट का निरीक्षण कर चुके हैं। उन्होंने इसके जीर्णोद्धार की बात भी कही थी। हालांकि अब इसकी मरम्मत का काम शुरू हो गई है और जल्द शुरू होगा।
डी-मर्जर की उम्मीद नहीं
मर्जर के बाद से अस्पताल में अभी पीडियाट्रिक्स और गायनी विभाग संचालित हैं। तभी से यह यूनिट भी बंद है। हालांकि गायनी विभाग में इस तरह की स्थिति नहीं बनी है कि इस यूनिट की कमी खले, फिर भी वैकल्पिक तौर पर इसे शुरू करना जरूरी है। इमरजेंसी पडऩे पर इस आईसीयू का उपयोग किया जा सकता है। डी-मर्जर को लेकर कोई पत्र अभी तक नहीं आया है। डॉक्टर भी अब डी-मर्जर के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं। एेसा इसलिए भी क्योंकि अस्पताल में कई डॉक्टर रिटायर्ड हो चुके हैं। डॉक्टरों की कमी भी बन चुकी है। इससे मरीज परेशान हो रहे है।
डायलिसिस वाले मरीज होते थे भर्ती इस यूनिट में डायलिसिस वाले और हादसे में घायल मरीज ही भर्ती होते थे। मर्जर के बाद बीएमसी में मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
वहीं सागर के सबसे बड़े अस्पताल में जहरीले केमिकल के निष्पादन के लिए इफफ्लूयेंट ट्रीटमेंट प्लांट(ईटीपी) नहीं है। पैथोलॉजी से प्रतिदिन सैकड़ों जांचें हो रही हैं। इनसे निकलने वाले केमिकल के ट्रीटमेंट की व्यवस्था न होने से परिसर में संक्रमण का खतरा बना हुआ है। सागर इकलौता एेसा अस्पताल नहीं है बल्कि पूरे प्रदेश के जिला अस्पतालों की यही स्थिति है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरे प्रदेश की पैथोलॉजी से प्रतिदिन निकलने वाले केमिकल से जमीन कितनी जहरीली हो रही है।
Published on:
10 Apr 2018 05:07 pm
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