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खेत से व्यापारी की दुकान तक पहुंचने में लगे पांच घंटे, जाम में फंसे रहे किसान, नहीं थे गार्ड

मंडी परिसर में व्यापारियों के रखे अनाज से भी बिगड़ रही व्यवस्थाएं, कुछ देर रुकी रही डाक

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It took five hours to reach the trader's shop from the farm, farmers were stuck in the jam, there were no guards

परिसर में फैला व्यापारी का अनाज, लगा जाम

बीना. कृषि उपज मंडी में इन दिनों जोरदार आवक हो रही और बड़ी संख्या में किसान मंडी पहुंच रहे हैं। करोड़ों रुपए का टैक्स कमाने वाली मंडी में सुविधाओं और व्यवस्थाओं के नाम पर कुछ नहीं है। शुक्रवार को अव्यवस्थाओं के कारण किसान घंटों जाम में फंसे रहे, लेकिन व्यवस्था बनाने न सुरक्षा गार्ड और न ही अन्य कर्मचारी पहुंचे। दोपहर ३ बजे के बाद करीब आधा घंटे का डाक तक रोकनी पड़ी थी।
दरअसल भीषण गर्मी के बीच किसान मंडी में अपनी उपज बेचने के लिए आ रहे हैं और फिर उन्हें परेशान होना पड़ रहा है। मंडी में जगह कम होने के कारण ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को मंडी के पीछे खेत में खड़ा किया जा रहा है। खेत में डाक नीलामी के बाद किसानों को व्यापारी की दुकान तक पहुंचने में पांच-पांच घंटे का समय लगा, क्योंकि परिसर में फैल व्यापारियों के अनाज के कारण जाम की स्थिति बनी रही। किसान प्रकाश सिंह निवासी रुसल्ला ने बताया कि सुबह ११ बजे डाक, नीलामी होने के बाद भी जगह न होने से ट्रैक्टर-ट्रॉली फंसने से दोपहर तीन बजे तक व्यापारी की दुकान तक तौल कराने नहीं पहुंच सके। क्योंकि यहां पर मनमानी करते परिसर में व्यापारियों ने अपनी उपज फैला कर रखी है। साथ ही जाम हटाने के लिए कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा, किसान स्वयं ही व्यवस्था बनाते हुए नजर आए।

धूप में अपनी बारी आने का करते रहे इंतजार
मंडी में अपनी बारी के इंतजार में धूप व गर्मी से बचने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के नीचे बैठकर समय गुजार रहे हैं। खुले मंडी परिसर व खेत में बैठकर किसान बोली का इंतजार करने को मजबूर हैं।

भटकना पड़ता है पानी को
किसानों के लिए मंडी परिसर में ठंडे पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। यहां पानी के लिए एक समाजसेवी ने प्याऊ खोला है, जहां पहुंचकर किसान अपनी प्यास बुझा रहे हैं। वहीं मंडी प्रबंधन की ओर से कुछ नल पानी के लिए लगाए गए हैं, जिनसे सभी किसानों को पानी नहीं मिल पाता है। कुछ दिनों पूर्व किसानों के प्रदर्शन में यह बात कही गई थी कि पूरी मंडी में किसानों के लिए फेरी के माध्यम से पीने के पानी की व्यवस्था की जाए, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है।