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मराठा कालीन 400 वर्ष पुराने मंदिर में भगवान जगन्नाथ के साथ विराजीं महालक्ष्मी, दीपावली पर सोने के आभूषणों से होगा श्रृंगार

परकोटा झिरना स्थित मराठा कालीन 400 वर्ष पुराने श्रीदेव जानकी रमण दनादन मंदिर में महालक्ष्मी भगवान जगन्नाथ के साथ विराजमान हैं। दीपावली पर यह मंदिर रोशनी से जगमग होगा। धनतेरस से यहां कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे।

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सागर

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Reshu Jain

Oct 27, 2024

laxmi

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महालक्ष्मी करती हैं भक्तों की मनोकामना पूरी, संतान प्राप्ति और शादी के लिए भक्त लगाते हैं अर्जी

सागर. परकोटा झिरना स्थित मराठा कालीन 400 वर्ष पुराने श्रीदेव जानकी रमण दनादन मंदिर में महालक्ष्मी भगवान जगन्नाथ के साथ विराजमान हैं। दीपावली पर यह मंदिर रोशनी से जगमग होगा। धनतेरस से यहां कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे। दीपावली पर विशेष सोने के आभूषणों से माता का श्रृंगार होगा और वृंदावन से आई नई पोशाक पहनाई जाएगी। त्योहार पर पूरे प्रदेश यहां भक्त पहुंचेंगे। कहते हैं कि मंदिर में लक्ष्मी माता की सिद्ध मूर्ति है। माता से प्रार्थना करने पर संतान प्राप्ति और शादी की मनोकामना पूरी हो जाती है।

मंदिर के महंत अंबिकेश महाराज ने बताया कि मंदिर में माता लक्ष्मी की प्राचीन मूर्ति है। मूर्ति के दोनों ओर हाथी बने हुए हैं। महालक्ष्मी भगवान जगन्नाथ बलभद्र और सुभद्रा के साथ विराजे हुए हैं। उन्होंने बताया कि यह मंदिर सागर के शासक और बाजीराव के सामंत गोविंद बल्लाल खेर के शासनकाल में बनाया गया था। स्थापना महंत दनादन महाराज ने की थी। मंदिर का नाम भी दनादन महाराज के नाम से है। लगातार कई पीढि़यां सेवा करती आ रही हैं।

किले की रानी आकर करती थीं पूजा

महंत अंबिकेश महाराज ने बताया कि पुराने लोग बताते हैं कि किले की रानी गुफा से आकर यहां पूजा करती थीं। अब वह गुफा बंद हो गई है। उन्होंने बताया कि मंदिर का झरना 12 माह सूखता नहीं है। महालक्ष्मी के रामजी के चारों भाई और भगवान गणेश की भी पुरानी मूर्ति हैं। उन्होंने बताया कि सागर के मराठी परिवारों के अलावा अन्य जगह के मराठी धर्मावलंबी महालक्ष्मी के दर्शन करने के लिए परकोटा के महालक्ष्मी मंदिर पहुंचते हैं।

दीपावली पर होगा अभिषेक

मंदिर में धनतेरस और दीपावली के दिन विशेष पूजा की जाती है। इसके अलावा दशहरे के दिन भी इस मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की जाती है। मंदिर में धनतेरस से लेकर भाई दूज तक भक्तों का तांता लगा रहता है। दीपावली पर विशेष महालक्ष्मी का अभिषेक किया जाएगा। उसके बाद शृंगार होगा। सोने-चांदी के आभूषणों से श्रृंगार होगा। महंत ने बताया कि देवीजी का नवरात्रि में भी मां नवदुर्गा ने नौ स्वरूप में श्रृंगार किया जाता है।