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सरहद से सागर तक गूंज रही महार जवानों की शौर्यगाथा

अफ्रीका, श्रीलंका और बांग्लादेश में भी दिखाया है महार लड़ाकों ने अपना पराक्रम, जीत के प्रतीक के रूप में उलटा टंगा है पाक फौज व हिजबुल मुजाहिदीन का ध्वज

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सागर

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Sanjay Sharma

Apr 02, 2019

mahar regiment centre sagar

mahar regiment centre sagar

सागर. देश की सीमा पर भारतीय फौज की वीरता की गाथाएं सागर के महार रेजिमेंट सेंटर स्थित म्युजियम में भी गूंज रही हैं। चाहे पुर्तगाल से गोवा की आजादी की लड़ाई हो या पाकिस्तान की बर्बरता से बांग्लादेश को मुक्ति दिलाने का संघर्ष। लिट्टे (तमिल उग्रवादी संगठन) एलटीटीई की मार-काट के कारण अराजकता का दंश झेल रहे श्रीलंका में शांति की बहाली। हर मोर्चे पर महार रेजिमेंट के जवानों ने अपना लोहा मनवाया है। आज देश की सीमाओं पर तनाव के चलते पुराने किस्सों में भारतीय सेना की वीरता की कहानियां सुनाई जा रही हैं। वहीं महार रेजिमेंट सेंटर का भव्य और समृद्ध म्युजियम भी इन गाथाओं का साक्षी बना हुआ है। महार जवानों के परिजन और शहर के प्रबुद्धजन भी इन शौर्य गाथाओं का दर्शन करने रेजिमेंट सेंटर पहुंचते हैं।

ये सब भी है म्युजियम की धरोहर -

1.पर्बत अली की लड़ाई-

रेजिमेंट सेंटर के म्युजियम में महार रजिमेंट की पाक सेना के साथ पर्बत अली की लड़ाई की जीवंत झांकी मॉडल के रूप में सहेजी गई है।

2.सिलहट की लड़ाई-

बांग्लादेश को आजादी दिलाने की लड़ाई में महार रेजिमेंट के जवानों ने सिलहट शहर से पाक सेना को खदेड़कर पाक ध्वज जब्त किया था।

3.गोवा की आजादी का संघर्ष-

देश आजाद था, पर पुर्तगाली सेना गोवा को छोडऩे तैयार नहीं थी। ऐसे में भारतीय सेना के सामने पुर्तगाली फौजियों को घुटने टेकने पड़े थे। महार जवानों द्वारा वहां से जब्त पुर्तगाली ध्वज अब म्युजियम में उनकी वीरता का यादगार बना है।

4. मशीन गन-

महार रेजिमेंट को भारतीय सेना में विशेष लड़ाकू रेजिमेंट के रूप में स्थापित करने में मशीनगन का विशेष योगदान रहा है। यह तब कई राऊंड फायर करने वाला इकलौता हथियार था। यह अब म्युजियम में शोभायमान है।

पाकिस्तान, पुर्तगाल, लिट्टे, और पाक-अफ्रीकन आततायियों पर पाई फतह

महार रेजिमेंट के जवानों की वीरता का इतिहास आजादी से आज तक इतना समृद्ध है कि इसे एक बारगी में देखना-समझना भी मुश्किल है। रेजिमेंट के योद्धा आजादी की लड़ाई के बाद से अब तक 1962 और 1967 में चीन के साथ संघर्ष करने के अलावा 1971, 1977 और 1999 में पाकिस्तान सेना, 1987 में श्रीलंका में लिट्टे, 1961 में संयुक्त राष्ट्र की ओर से भेजे जाने पर अफ्रीका के कांगों में स्थानीय आततायियों पर फतह हासिल कर चुकी है। भारतीय सेना की जीत के प्रतीक के रूप में पाकिस्तानी सेना, पुर्तगाली सेना, कांगो के कटंगा संगठन, लिट्टे और पाक समॢथत आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के उलटे झंडे एमआरसी के म्युजियम में रखे गए हैं।

मोर्टार, बम, तोप, बंदूक और खुफिया उपकरण किए थे जब्त

महार जवानों ने पाकिस्तान के साथ हुए युद्धों में हर बार अपनी विजय पताका फहराई है। इन संघर्षों में हर बार पाक सेना को भागना पड़ा और मोर्चा से भारतीय सेना ने हथियार, गोलू और खुफिया उपकरणों के रूप में वायरलेस, ऑडियो प्लेयर, ट्रांजिस्टर, कैसेट ही नहीं मौके से भागे पाक सैनिकों के परिजनों की चि_यां, कपड़े और निजी सामान भी जब्त किए थे। ये सब सामग्री अब एमआरसी म्युजियम में महार सैनिकों की विजय गाथा सुना रही है।