
Mouni Amavasya will be a special coincidence on Saturday after thirty
सागर. साल की पहली शनिश्चरी अमावस्या 21 जनवरी को होगी। इस बार खास संयोग है कि मौनी शनिश्चरी अमावस्या पर शनि अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में रहेंगे। इस दौरान खप्पर योग, चतुरग्रही योग, षडाष्टक योग व समसप्तक योग भी बनेंगे। साल की सभी 12 अमावस्या में यह एकमात्र अमावस्या है, जिसमें स्नान, दान के अलावा मौन व्रत रखने का खासा महत्व है। इस दिन मौन रहकर जप, तप, साधना, पूजा पाठ किए जाते हैं। पौराणिक मान्यताओं में माघ मास की अमावस्या को दान पुण्य करने से सभी प्रकार के कष्टों और पापों से मुक्ति मिलती है।पहलवान बब्बा शनि देव मंदिर के पुजारी रुपेश तिवारी ने बताया कि माघ मास की मौनी अमावस्या को धार्मिक कार्यों के लिए विशेष माना गया है। अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ माने गए हैं, इसलिए इस दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध किया जाता है। वहीं इस दिन पितृ दोष और कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए व्रत रखा जाता है। इस बार मौनी शनिश्चरी अमावस्या पर 30 साल बाद पंचांग गणना से खप्पर योग बन रहा है।
सूर्य-शुक्र की युति में बन रहा खप्पर योग
पं. केशव महाराज ने बताया कि भारतीय ज्योतिष में नौ ग्रहों में ऊर्जावान, सुंदर और आध्यात्मिक कारक शनि ढाई साल में राशि परिवर्तन करता है। इन ढाई सालों में कभी वक्री अवस्था तो कभी सीधी राह में चलता है। शनि गणना चक्र के बाद एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है। इस बार मौनी अमावस्या पर शनि का राशि परिवर्तन चार दिन पहले हुआ है। कुंभ राशि में शनि की उपस्थिति से इस बार मौनी अमावस्या का महापर्व बन रहा है। खास बात यह भी है कि मकर राशि में सूर्य, शुक्र की युति और त्रिकोणों के अधिपति मूल त्रिकोण की स्थिति खप्पर योग बना रही है। इस दौरान दान, तीर्थ यात्रा, भागवत श्रवण आदि का विशेष महत्व है।
शनिमंदिर में होगा यज्ञ
पहलवान बब्बा शनि देव मंदिर में हर शनिवार को सार्वजनिक होमत्मक अखंड यज्ञ किया जाता है। पुजारी रूपेश ने बताया कि मौनी अमावस्या पर भी यज्ञ किया जाएगा। सैकड़ों की संख्या में भक्त उपस्थित रहेंगे। यज्ञ प्रात: 5.00 बजे पंचांग पूजन के बाद आरंभ होता है और यज्ञ की पूर्णाहुति रात्रि 10.00 बजे होती है। हवन सामग्री श्रद्धालुओं को नि:शुल्क दी जाएगी।
Published on:
17 Jan 2023 08:42 pm
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