
आकाश तिवारी.सागर. सरकार ने रोशनी क्लीनिक योजना के तहत दूसरे बच्चे की चाह रखने वाले गरीब दंपतियों को टेस्ट ट्यूब बेबी की सुविधा देने पर रोक लगा दी है, जबकि एक संतान के लिए योजना सुचारू रूप से जारी है। जानकारी के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग की रोशनी क्लीनिक योजना के अंतर्गत बीते आठ महीने में ३३२ दंपती पहुंचे थे, जिन्हें संतान नहीं हो रही है। विभाग ने इनमें से ५९ दंपती तो ऐसे चुने जिन्हें दूसरी संतान चाहिए थी, जबकि कुल २९ दंपतियों को टेस्ट ट्यूब बेबी केयर भेजा, लेकिन इनमें से भी दो ही महिलाएं गर्भवती हो सकी हैं। ये दोनों ही प्राइमरी इनफर्टीलिटी (पहली संतान न होने वाले) केस थे। इस बीच शासन द्वारा योजना के तहत दूसरी संतान की चाह रखने वाले दंपतियों के केस पर रोक लगाने से करीब आधा सैकड़ा लोग निराश हो गए हैं।
दो साल पहले जिला अस्पताल में रोशनी क्लीनिक शुरू हुई थी। १२ अप्रैल २०१७ से ३ जनवरी २०१८ तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो रोशनी क्लीनिक में १२३१ महिलाओं ने अपने पंजीयन कराए थे। यह जिले भर में आयोजित महिला स्वास्थ्य शिविरों से रेफर होकर क्लीनिक में आई थीं। इनमें प्राइमरी इनफर्टीलिटी के २७३ और सेकंण्डरी के ५९ केस थे।
छह महिलाएं हुईं गर्भवती
३३२ में से छह महिलाएं एेसी थीं, जिनका उपचार गायनी विभाग की सीनियर डॉक्टरों ने किया। फलस्वरूप समस्त जांच और उपचार के बाद यह मां बन गई हैं। इनमें से कुछ महिलाओं की बच्चेदानी की दोनों ट्यूब बंद थीं, जिन्हें उपचार के दौरान खोला गया।
आउटसोर्स से कराई जा रहीं जांच
बाहर से जो जांचें कराई जा रही हैं, इनमें मेमोग्राफी, एफएनसी, पेप स्मियर, आडियोमेंट्री, यूरोफ्लोमेट्री, सीटी स्केन, एमआरआई, हिस्ट्रोसेलपिंजोग्राफी और फोलीक्यूलर मॉनिटरिंग शामिल है, इसके लिए अस्पताल प्रबंधन द्वारा मकरोनिया स्थित निजी सेंटर से अनुबंध किया है। वहीं, थायराइड की जांच के लिए थायरोकेयर तिली मार्ग से अनुबंध किया है।
& शासन ने अभी सेकण्डरी इनफर्टीलिटी वाले केस पर रोक लगाई है। हमारे पास एेसे केस ५९ ही हैं। २९ केस टेस्ट ट्यूब बेबी के लिए भेजे जा चुके हैं। दो में सफलता मिली है।
डॉ. ललिता पाटिल,
प्रभारी रोशनी क्लीनिक
Published on:
11 Jan 2018 12:00 pm
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