
Music with studies Makes rhythm New energy communication
मनीष कुमार दुबे. सागर. आदर्श संगीत महाविद्यालय में संगीत की परीक्षा लेने भोपाल से आई डॉ. सीतारानी तिवारी ने जहां सरल से लेकर कठिन रागों का परीक्षण किया वहीं एक शिक्षक की तरह गाकर उन्हें मार्गदर्शन भी दिया ताकि वे हर राग को जान और समझ सकें। उन्होंने लय, ताल, पकड़, आरोह, अवरोह, तराना को भी बड़ी आसानी से सिखाया। इस दौरान डॉ. तिवारी ने पत्रिका से विशेष बातचीत की जो इस प्रकार है..
पत्रिका- सागर के छात्र-छात्राओं में संगीत के प्रति कैसा रुझान महसूस कर रही हैं आप।
डॉ. तिवारी- सागर का संस्कार साहित्य का है, संगीत का है इसलिए यहां इतने परीक्षार्थी देखने मिल रहे हैं। संगीत के प्रति लोगों का लगाव इसका प्रमाण है। परीक्षा के लिए दो दिन कम पड़ रहे हैं।
पत्रिका- छात्र-छात्राओं की तैयारी के बारे में क्या कहना चाहेंगी आप।
डॉ. तिवारी- छोटे-छोटे बच्चों ने अच्छी तैयारी की है। वे आरोह-अवरोह और अलंकार को भी बेहतर तरीके से प्रस्तुत करते हैं।
पत्रिका- टीवी पर आने वाले टेलेंट शो और इन छात्र-छात्राओं के बारे में आप क्या कहेंगी।
डॉ. तिवारी- ये बच्चे संगीत की बारीकी से जानकारी ले कर सीख रहे हैं। आगे बढऩे के उत्तम लक्षण हैं। लेकिन टेंलेंट शो के बारे में बात की जाए तो वहां विशेष रूप से हर छात्र को अलग से अभ्यास कराया जाता है हर गाने पर अलग से मेहनत की जाती है, फोकस होता है। कई लोगों का इसमें सहयोग होता है। सागर के बच्चे भी इसमें बड़ी आसानी से आगे जा सकते हैं।
पत्रिका- सागर के लोगों को क्या सीख देना चाहेंगी।
डॉ. तिवारी- देखिए मैं तो इतना ही कहना चाहूंगी कि संगीत को मां सरस्वती का वरदान मानकर सीखना चाहिए। हर परिवार में संगीत की जानकारी होना चाहिए। जब बच्चा संगीत सीखता है तो वह विनम्र होता है, उसके अंदर पढ़ाई के अलावा भी नई ऊर्जा का संचार होता है जो एक अलग प्रकार की खुशी देता है।
पत्रिका- बच्चों को रियाज के बारे में कुछ बताना चाहेंगी आप।
डॉ. तिवारी- हां माता-पिता रियाज के समय थोड़ा ध्यान रखें क िजो बताया गया है उसी के अनुसार रियाज किया जा रहा है या नहीं। वैसे यदि विलंबित लय में सुरों का अभ्यास किया जाए तो गले में काफी सफाई आती है और जो गलतियां होती हैं वह आसानी से सुधर जाती हैं।
परिचय-
डॉं. सीतारानी तिवारी की शिक्षा- संगीत प्रवीण, एमए संगीत, पीएचडी, संगीत प्रभाकर तबलां।
गुरु- आपके पिता नंद किशोर शर्मा भी संगीताचार्य हैं जिन्हें भोपाल श्री की उपाधि से म्मानित किया जा चुका है। पिता से संगीत की शिक्षा ली। इसके साथ डॉ.गणेश प्रसाद भारद्वाज, आचार्य वृहस्पति एवं सुलोचना वृहस्पति, प्रो. रामाश्रय झा, डॉ. गीता बेनर्जी।
संप्रति-३० सालों से संगीत की साधना में रत डॉं. तिवारी एमएलबी कॉलेज भोपाल से सेवानिवृत्त हैं। संगीत के क्षेत्र में कुशल मार्गदर्शक हैं।
किसी ने राग यमन गाया तो किसी ने अहीर भैरव
आदर्श संगीत महाविद्यालय में बुधवार को प्रथम वर्ष से लेकर एमए तक के विद्यार्थियों की गायन की परीक्षाएं आयोजित की गईं।
भोपाल से परीक्षा लेने आईं डॉं. सीतारानी तिवारी ने बताया कि प्रथम वर्ष में ही आरोह अवरोह का अच्छा अभ्यास किया जाए तो आगे गला अच्छा रहता है। डॉ. तिवारी ने राग, तान, पकड़, घरानों के बारे में बारीकी से पूछा। मंद और तार सप्तक तक सुरों को साधने की कला परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों को सिखाई।
उन्होंने बताया कि जब संगीत साधना का रूप ले लेता है तो आसान हो जाता है। इस दौरान प्राचार्य नवल कुमार स्वर्णकार, तबला वादक विभूति मलिक और डॉ. प्रेम चतुर्वेदी मौजूद थे।
Published on:
06 Apr 2018 01:53 pm
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