
छह राज्यों के 70 नाड़ी वैद्य का यहां होगा जमावड़ा
सागर. डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विवि में शुक्रवार से 6 जनवरी तक जनजातीय पारम्परिक ज्ञान: विज्ञान पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इस आयोजन की अहम बात यह है कि इसमें 6 राज्यों से 70 नाड़ी वैद्य शामिल हो रहे हैं। 5 और 6 जनवरी को सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे स्वास्थ्य शिविर लगाया जाएगा। यह शिविर चकराघाट और विवि परिसर में लगेगा। विवि के कुलपति प्रो. आरपी तिवारी ने बताया कि अक्टूबर महीने में आदीवासी बहुल्य क्षेत्र सीधी में विवि की टीम तीन दिन के लिए गई थी, जहां आदिवासियों के उपचार की विधि और उनके रहन सहन के संबंध में विस्तृत जानकारियां ली। कुलपति प्रो. तिवारी ने बताया कि यहां के नाड़ी वैद्य को राष्ट्रीय कार्यशाला के लिए साल श्रीफल देकर आमंत्रित किया था, जो इस कार्यशाला में शामिल होने के लिए आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि विवि में ६ राज्यों के ७० नाड़ी वैद्य ने आमंत्रण स्वीकार किया है और सभी इसमें शामिल होने के लिए आ रहे हैं। कार्यशाला को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में कुलपति प्रो. तिवारी ने बताया कि शुक्रवार को सुबह ९ बजे इसका उद्घाटन अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष नंद कुमार साय करेंगे। कार्यशाला की अध्यक्षता कुलपति प्रो. तिवारी करेंगे।
आयोजन सचिव प्रो. केकेएन शर्मा ने बताया की जनजातिय समस्त भारतीय जनसंख्या का लगभग 8.2 प्रतिशत भाग का प्रतिनिधित्व करते है। इनकी जीवन शैली प्रकृति से ओत-प्रोत है और ये इसके रहस्यों को समझ पाने में समर्थ हैं। इन गूढ़ रहस्यों को समझ कर अलिखित रूप से अपने पारम्परिक ज्ञान के तहत एक से दूसरी पीढ़ी में अलिखित रूप से हस्तांतरित कर इसका लाभ उठा रहें हैं। नाड़ी वैद्य अपने साथ लगभग 1200 औषधी पौधों को लेकर आ रहे हैं, जिसका वृक्षारोपण दोपहर 1 बजे फार्मेंसी गार्डन होगा।
संरक्षित करने की जरूरत
कुलपति ने बताया कि यदि हम उनके इस ज्ञान को दस्तावेज कर संरक्षित न कर पाए तो आने वाली पीढ़ी हमे माफ नहीं करेगी। उनका यह अद्भुत शास्वत ज्ञान विलुप्त हो जाएगा। उद्घाटन सत्र के बाद प्रथम, द्वितीय व तृतीय सत्र में ये नाड़ी वैद्य अपनी जड़ी बुटियों के साथ परम्परागत उपचार पद्वति का प्रस्तुतिकरण करेंगे। दस्तावेजीकरण के साथ-साथ वीडिग्राफी कराई जा रही है।
Published on:
04 Jan 2019 08:01 am
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