25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

शहर की स्वच्छता और सुंदरता को हांक रहे मवेशी, भोपाल तक पहुंच चुकी है बात, शहर सरकार अनजान

पहली बार शहर आईं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के वाहन से गाय टकराने के बाद भी कोई खास पहल नहीं की गई है।

2 min read
Google source verification
'सागर' के हृदय में सांड, गाय, भैंस और कुत्ते, चारागाह सी लगती है ये कल की स्मार्ट सिटी

'सागर' के हृदय में सांड, गाय, भैंस और कुत्ते, चारागाह सी लगती है ये कल की स्मार्ट सिटी

सागर. मुख्य सड़कों से लेकर पॉश इलाकों और गली-कूचों में घूमते आवारा मवेशियों ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित हो रहे सागर में सांड, गाय और भैंसों की संख्या देखकर ये शहर चारागाह सा नजर आता है। बहुतायत में घूमते कुत्ते लोगों की मुसीबत और बढ़ा रहे हैं।
बुधवार को पहली बार शहर आईं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के वाहन से गाय टकराने के दो दिन बाद भी प्रशासन या नगर निगम की ओर से कोई खास पहल नहीं की गई है। ये स्थिति तब है जब राज्यपाल ने कमिश्नर, कलेक्टर के साथ महापौर को भी सर्किट हाउस में तलब करते हुए आवारा मवेशियों की परेशानी को गंभीरता से लेने को कहा था। निगम का अमला आवारा पशुओं को पकडऩे की कार्रवाई तो कर रहा है लेकिन हालात जस के तस हैं। इधर, तीन कांजी हाउस बंद पड़े हैं। एक पर तो लोगों ने कब्जा कर रखा है। डेयरी विस्थापन का मामला भी ठंडे बस्ते में है। आवारा मवेशियों का सबसे बड़ी वजह पशुपालकों में जागरूकता की कमी है। पशु पालक दूध दुहकर पशु को आवारा छोड़ देते हैं।

कांजी हाउस: तीन हैं, एक में कब्जा, दूसरे में ऑडिटोरियम, तीसरे में मार्केट तनवा दिया

आवारा पशुओं पर कार्रवाई करने के लिए जिम्मेदार नगर निगम के हालात अच्छे नहीं हैं। कहने को तो निगम पशुओं को पकडऩे की कार्रवाई कर एक निजी गौशाला में भेज रहा है, लेकिन सवाल यह है कि निगम के खुद के तीन कांजी हाउस हैं, जो वर्तमान में बंद हैं। इनमें से मोतीनगर स्थित कांजी हाउस में ऑडिटोरियम बन रहा है, जबकि पुरानी गल्ला मंडी के पास स्थित कांजी हाउस मार्केट में तब्दील हो चुका है और दुकानें आवंटित की गई हैं। वहीं सोमनाथ पुरम स्थित तीसरे कांजी हाउस में एक स्थानीय परिवार ने अवैध कब्जा कर रखा है। बताया जा रहा है कि यह परिवार भाजपा से जुड़ा नेता है। साथ ही कांजी हाउस का एक हिस्सा शासकीय उचित मूल्य की राशन दुकान को दिया गया है।

संसाधनहीन कंधों पर जानवरों को पकडऩे की जिम्मेदारी
निगम के अतिक्रमण दस्ते के कमजोर कंधों पर है। स्थिति यह है कि टीम के पास महज एक डंपर व एक रस्सी मात्र है। जानवरों के खुरों से बचने के लिए कर्मचारियों के पास वे जूते भी नहीं है जिससे भड़के जानवर के पैरों से बचा जा सके।

महापौर बोले: जुर्माना वसूलेंगे
महापौर अभय दरे का कहना है कि आवारा पशुओं को लेकर अब हमनें पशुपालकों पर जुर्माना लगाने का निर्णय लिया है। कांजी हाउस तो हैं लेकिन उनमें जगह नहीं है। पुरानी गल्ला मंडी के पास वाला कांजी हाउस कब दुकानों में तब्दील हुआ मेरी जानकारी में नहीं है, इसका पता लगाया जाएगा।