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दहेज लेने वाले लोभियों के यहां कभी अपनी बेटियों का विवाह न करें : चिन्मयानंद बापू

सागर. खेल परिसर के बगल वाले मैदान में चल रही राम कथा के छठवें दिन शुक्रवार को चिन्मयानंद बापू ने कहा कि भगवान राम के विवाह उत्सव के बाद महाराज जनक ने विभिन्न तरह की बहुत वस्तुएं अयोध्या उपहार स्वरूप में भेजी थी। बापू ने कहा कि आजकल जो विवाह समारोह में मांगने की प्रथा चल गई है वह बहुत गलत है और ऐसे लोभियों के यहां कभी अपनी बेटियों का विवाह न करें, जो लोग विवाह को एक सौदा में परिवर्तित कर रहे हैं। कथा के माध्यम से उन्होंने दहेज प्रथा का विरोध किया।

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कथा श्रवण करते श्रद्धालु

कथा श्रवण करते श्रद्धालु

कथा में छठवें दिन राम विवाह उत्सव मनाया

सागर. खेल परिसर के बगल वाले मैदान में चल रही राम कथा के छठवें दिन शुक्रवार को चिन्मयानंद बापू ने कहा कि भगवान राम के विवाह उत्सव के बाद महाराज जनक ने विभिन्न तरह की बहुत वस्तुएं अयोध्या उपहार स्वरूप में भेजी थी। बापू ने कहा कि आजकल जो विवाह समारोह में मांगने की प्रथा चल गई है वह बहुत गलत है और ऐसे लोभियों के यहां कभी अपनी बेटियों का विवाह न करें, जो लोग विवाह को एक सौदा में परिवर्तित कर रहे हैं। कथा के माध्यम से उन्होंने दहेज प्रथा का विरोध किया।

बापू ने कहा कि कभी-कभी हमें अशक्ति के कारण भी दुख उठाना पड़ता है, इसलिए इस धरती पर पूर्ण सुखी कोई नहीं हो सकता। धरती पर जब स्वयं प्रभु राम के पिता को भी रोना पड़ा, तो हम सब तो साधारण मनुष्य के जीवन में है। भगवान राम वनवास के दौरान प्रयागराज में रुके। बापू ने कहा कि जो लोग राम के ऊपर सवाल उठाते हैं राम के अवतार लेने पर सवाल उठाते हैं। वह प्रयागराज में जाकर अक्षय वट का दर्शन करें। जिसको कई बार मुगल शासन में और अंग्रेजों के शासन में जला दिया गया उसके बाद अक्षय वट आज प्रयागराज में है और हम उसका दर्शन करते हैं क्योंकि अक्षय वट स्वयं प्रभु राम के जीवन से जुड़ा है। जहां वनवास काल के दौरान भगवान राम ने एक रात्रि विश्राम किया था। शनिवार दोपहर 11 बजे से बापू कथा स्थल पर समस्त श्रद्धालुओं से मिलेंगे।