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अमानक पानी पाउच का अवैध करोबार चरम पर, बिगड़ रही शहर की सेहत

शहर भर में फैला दूषित पानी का करोबार, हर दुकान पर बिक रहे अमानक पानी पाउच, बिना आइएसआई सर्टिफाइड कंपनी नहीं पैक कर सकती किसी भी प्रकार का पानी, यहां खाद्य विभाग के दिए लायसेंस नंबर के आधार पर ही हो रही पैकिंग

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Non-standard water pouch disturbing health

Non-standard water pouch disturbing health

सागर. अवैध पैक पानी का करोबार दिन-दिन अपने पैर पसारता जा रहा है। शहर में कुछ समय पहले तक पानी का करोबार करने वाली कंपनियों की संख्या जहां दर्जन भर थी वहीं आज की स्थिति में उनकी संख्या बढ़कर 30 के पार पहुंच चुकी है। खाद्य औषधी विभाग के अधिकारियों की अनदेखी और लापरवाही के कारण शहर भर की दुकानों पर खाना बनाने वाला पानी पीने के लिए बेचा जा रहा है और यह अमानक पानी शहर की सेहत बिगाड़ रहा है। हैरत की बात तो यह है कि इन पानी के पाउच पर स्पष्ट रूप से (फॉर कुकिंग पर्पस) लिखा होने के बाद भी यह ड्रिंकिंग वॉटर के रूप में बेचा जा रहा है। इस अमानक पानी की जानकारी शहर के दुकानदारों को तो नहीं है, लेकिन पैकिंग करने वाली कंपनियों से मिलीभगत होने के कारण जिम्मेदार अधिकारी भी आंख मूंद कर बैठे हैं।

केवल दो कंपनी आइएसआइ सर्टिफाइड

जानकारी के अनुसार पानी की पैकिंग करने के लिए जिले भर में केवल दो एेसी कंपनियां हैं जो आइएसआई सर्टिफाइड हैं। जिसमें से एक मकरोनिया और दूसरी देवरी नगर में संचालित हो रही है। इसके अलावा जो भी कंपनियां पैक पानी का करोबार कर रहीं हैं, वे आइएसआइ सर्टिफिकेशन की जगह पर स्थानीय खाद्य विभाग द्वारा किए गए पंजीयन का नंबर उपयोग कर रहीं हैं, जो नियम विरुद्ध है।

फैक्ट्री की जगह दुकानों से लेते रहे सैंपल

पैक पानी के इस अवैध करोबार को हवा देने में सबसे बड़ा योगदान या फिर सहयोग खाद्य औषधी विभाग के अधिकारियों का ही है। क्योंकि जब भी अमानक पैक पानी की कोई शिकायत या अखबार में खबरें प्रकाशित होती हैं तो अधिकारी शहर की कुछ दुकानों से पानी पाउच के सैंपल लेते हैं और उन्हें जांच के लिए भेजकर अपनी नौकरी पूरी समझ लेते हैं, लेकिन यह अधिकारी कभी उस फैक्ट्री की जांच करने नहीं पहुंचते हैं, जहां से इस कारोबार का संचालन किया जा रहा है यानी पानी की पैकिंग की जा रही है।

प्लांट लगाएं तो पड़ेगा महंगा

जानकारी के अनुसार पानी पैकिंग का प्लांट लगाने के लिए सबसे पहले भारतीय मानक ब्यूरो से लायसेंस लेना जरूरी होता है। इसके लिए जिस पानी का उपयोग पैकिंग में किया जाना है उसकी टैस्टिंग होगी और उसी के अनुसार प्लांट तैयार किया जाएगा, लेकिन इस प्लांट को तैयार करने में और नियमानुसार अनुमति व आइएसआई सर्टिफिकेशन लेना होगा, बिल्डिंग डिजाइन भी मानक के अनुसार होगी, टेस्टिंग लैब बनानी होगी, आरओ प्लांट स्टील का होगा, भारतीय मानक ब्यूरो स्वयं साल में दो बार पानी की टैस्टिंग करती है और इस सब में व्यक्ति को करीब एक करोड़ रुपए का व्यय आएगा। वहीं बिना किसी परमीशन के, बिना प्लांट के किसी को पानी की पैकिंग करनी है तो वह महज सवा से डेढ़ लाख रुपए खर्च कर एक पैकिंग मशीन खरीदकर यह काम शुरू कर सकता है, लेकिन यह नियम विरुद्ध तरीका है।

शहर में 9 कंपनियां कर रहीं पैकिंग

जानकारी के अनुसार शहर में पानी का करोबार करने वाली कंपनियां तो 30 से ज्यादा हो चुकी हैं, लेकिन इसमें से 9 एेसी कंपनियां हैं जो पैक पानी का कारोबार कर रहीं हैं। इसमें से मकरोनिया में संचालित केवल एक कंपनी एेसी है जो आइएसआई सर्टिफाइड है, बाकी की 8 कंपनियां बिना किसी मानक के ही पैक पानी का करोबार कर रहीं हैं और इन्हें रोकने का भी कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।

यह भी हैं कुछ महत्वपूर्ण पहलू

एक कंपनी आइएसआई सर्टिफाइड

मेरी जानकारी के अनुसार शहर में केवल एक कंपनी आइएसआई सर्टिफाइड है। इसके अलावा यदि कहीं बिना आइएसआइ सर्टिफिकेशन के पानी की पैकिंग की जा रही है तो बेचने और पैक करने वाले दोनों पक्षों पर कार्रवाई की जाएगी।
पंकज श्रीवास्तव, निरीक्षक, खाद्य औषधी विभाग