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22 दिन बाद भी गोदामों में नहीं पहुंचा एक लाख क्विंटल अनाज

खरीदी समाप्त फिर भी ये हाल

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Not arrived warehouses One lakh quintals grain

Not arrived warehouses One lakh quintals grain

सागर. शासन के निर्देश के बाद समर्थन मूल्य पर पर गेहूं, चना, मसूर व सरसों की खरीदी तो कर ली गई, लेकिन शुरू से हो रही परिवहन में लेटलतीफी खरीदी समाप्त होने के बाद भी पटरी पर नहीं आ सकी है। हालात यह है कि संभाग के पांचों जिलों में समितियों द्वारा जो खरीद की गई है, उसमें से एक लाख क्विंटल अनाज गोदामों तक नहीं पहुंच सका है। इस साल गेहूं सहित चना, मसूर व सरसों की खरीदी ऑनलाइन की गई है, लेकिन आखिरी समय हजारों मीट्रिक टन खरीदी के लिए ऑफलाइन टोकन जारी बांटे गए थे। यहां पर यह आशंका जताई जा रही है कि ऑफलाइन काटे गए टोकन में फर्जीवाड़ा हुआ है। यही कारण है कि खाद आपूर्ति निगम ने समितियों से क्लोजिंग और रिक्लीयरेंस रिपोर्ट मांगी है।
दूसरे जिलों में भेजा: प्रदेश के 9 जिलों में खरीदी अधिक होने से भंडारण में दिक्कत हुई है, इसमें संभाग के सागर, दमोह व पन्ना भी शामिल थे। यहां खरीदी गई उपज को डेढ़ सौ से दो सौ किलो मीटर दूर भंडारण के लिए भेजा गया है।


अभी की स्थिति
गेहूं- सागर 1379, दमोह 1280, टीकमगढ़ 836, छतरपुर 00, पन्ना 467, टोटल 3969 क्विंटल गेहूं परिवहन के लिए शेष ।
चना, मसूर व सरसों- सागर 23349, दमोह 48598, टीकमगढ़ 1940, छतरपुर 6399, पन्ना 14978, टोटल 95256 क्विंटल परिवहन के लिए शेष।
अनाज हो रहा बर्बाद
बीते दिनों सागर जिले में २५ हजार क्विंटल से ज्यादा अनाज बारिश की जद में आने के कारण भीगा था और इसमें से दो-चार हजार क्विंटल बर्बाद भी हो गया। यही स्थिति संभाग के बाकी चार जिलों में भी रही है। संभाग के पांचों जिलों में अनुमानित १५ से २० हजार क्विंटल अनाज (गेहूं, चना, मसूर व सरसों) बर्बाद हो गया है।

यह है खेल
खरीदी के अंतिम समय भीड़ बढऩे पर सरकार ने ऑफलाइन टोकन बांटने के निर्देश दिए थे। कुछ समितियों ने व्यापारियों का अनाज खपाने एडवांस में गुमनाम किसानों के नाम टोकन व्यापारियों को बांट दिए। इसके बाद खरीदी केंद्रों पर भीड़ और बढ़ गई। स्थानीय जिला प्रशासन ने सख्ती कर किसानों के रिर्काड की जांच की तो खरीदी बंद हो गई। अब सामने आ रहा है कि खरीदी हुई नहीं और समितियों ने रिकार्ड में ज्यादा खरीदी के आंकड़े भर कर खाद्य विभाग को भेज दिए हैं, लेकिन अब यही जानकारी परेशानी बन गई। उनकी गले की फांस बन रही है।