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पापा…पापा…दिवाल गिल गई, भैया नई दिथ रा…सुनते ही पिता सन्न, घटना स्थल की ओर दौड़े

9 परिवारों की चीखों से सहमा है शाहपुर, बच्चों के घर से बाहर जाने पर अब रोक-टोक रहे परिजन सागर. पापा…पापा…दिवाल गिल गई, भैया नई दिथ रए। 4 साल की मासूम बेटी की तोतली आवाज मृतक दिव्यांश के पिता नीलेश साहू के कान में पिछले 36 घंटों से गूंज रही है। पिता नीलेश साहू ने […]

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सागर

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Nitin Sadaphal

Aug 06, 2024

पर्व विश्वकर्मा के परिवार की चीखें, दिव्यांस के पिता नीलेश साहू ,फूट-फूट कर रोया पिता कमलेश पटेल , मृतक दिव्यांस साहू की छोटी बहन, पर्व विश्वकर्मा के दादा काशीराम विश्वकर्मा

पर्व विश्वकर्मा के परिवार की चीखें, दिव्यांस के पिता नीलेश साहू ,फूट-फूट कर रोया पिता कमलेश पटेल , मृतक दिव्यांस साहू की छोटी बहन, पर्व विश्वकर्मा के दादा काशीराम विश्वकर्मा

9 परिवारों की चीखों से सहमा है शाहपुर, बच्चों के घर से बाहर जाने पर अब रोक-टोक रहे परिजन

सागर. पापा...पापा...दिवाल गिल गई, भैया नई दिथ रए। 4 साल की मासूम बेटी की तोतली आवाज मृतक दिव्यांश के पिता नीलेश साहू के कान में पिछले 36 घंटों से गूंज रही है। पिता नीलेश साहू ने बताया कि दिव्यांश के साथ उसकी छोटी बहन भी मंदिर गई थी। हादसे के बाद वह दौड़ी-दौड़ी आई और घबराकर तोतली आवाज में हादसे की जानकारी दी, जिसके बाद मोहल्ले के लोग मंदिर तरफ दौड़े, जहां मलबे में दबे दिव्यांश को लहूलुहान हालत में बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकीं थीं। घटना के बाद से ही उसकी छोटी बहन सहमी हुई है। परिवार के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। मासूम को भी एहसास है, कि अब उसका भाई वापस लौट कर नहीं आएगा। टूटी-फूटी जुबान में मासूम बार-बार घटना का जिक्र कर रही है। ऐसे ही चीखें शाहपुर के अन्य 8 घरों से निकल रहीं हैं, जिन्होंने अपने लाड़लों को खोया है। परिजनों के विलाप से पूरा नगर सहमा हुआ है, लोग घबराए हुए हैं और अपने बच्चों को घर से बाहर जाने पर रोक-टोक कर रहे हैं।

बेटा बार-बार पूंछ रहा था मैं बच जाऊंगा

मृतक हेमंत के पिता भूरे जोशी ने बताया कि हादसे के बाद उसे इलाज के लिए अपने परिचित डॉक्टर के पास दमोह ले जा रहे थे। रास्ते में बेटा बार-बार पूछ रहा था कि पापा मैं बच जाउंगा, बेटे को हौसला देने के लिए पिता कहते रहे कि बेटा तेरी जान बचाने खुद की जान लगा दूंगा, लेकिन दमोह पहुंचने के पहले कोपरा नदी में बाढ़ के कारण रास्ता बंद था। लौटकर पथरिया होते हुए दमोह पहुंचे लेकिन हेमंत की सांसें थंम गईं। पिता को भी मलाल है कि कोई उसके बेटे को सागर जाने की कह देता तो शायद हेमंत की जान बच जाती।

मिट्टी भी नसीब नहीं हुई तो फूट-फूट कर रोया पिता

बेटे नीतेश की मौत की सूचना के बाद कमलेश पटेल गुजरात से भागे-भागे आए। सोमवार की दोपहर जब वह घर पहुंचे, तो परिजन लिपटकर रोने लगे। परिजनों को ढांढस बंधाने के बाद पिता फूट-फूट कर रोया। कमलेश ने कहा कि मुझे अपने बेटे की मिट्टी भी नसीब नहीं हुई। कल सुबह ही तो बात हुई थी और आज बेटा इस दुनिया में नहीं है। कुछ दिनों पहले ही वह गुजरात से आया था। घर आकर व खुश था, रोज उसका हालचाल जानने फोन लगाते थे। बेटा के लिए ही गांव से बाहर जाकर काम करते थे, अब बेटा ही नहीं रहा।

पोते के गम में रो-रोकर सूख गईं दादा की आंखें

पर्व विश्वकर्मा की मौत की खबर सुनने के बाद परिवार की चीखें रुकने का नाम नहीं ले रहीं हैं। पर्व अपने दादा काशीराम विश्वकर्मा का लाड़ला था। हादसे के समय पिता फूल कुमार ड्यूटी पर थे, लेकिन सूचना पर दादा ने घर से ही दौड़ लगाई। पता चला कि पर्व को सागर ले गए हैं, तो दादा भी वाहन करके पीछे-पीछे सागर आ गए। यहां पता चला कि पर्व की मौत हो गई है। रविवार की सुबह से ही काशीराम विश्वकर्मा के आंसू नहीं रूके। पोता के जाने के बाद दादा को गहरा सदमा लगा है। काशीराम के बेटे-बहू की सिर्फ एक ही संतान थी।

तीन दोस्तों को खोने के बाद निहाल घर से नहीं निकला

मंदिर में हुए हादसे के बाद 10 वर्षीय निहाल सिंह लोधी सहम गया है। वह घर के दरवाजे की चौखट से ही आते-जाते लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों को देख रहा है। घटना स्थल भी उसके घर के सामने ही है। पिता सुरेंद्र ने कहा कि उसके दोनों बच्चों को गहरा सदमा लगा है, खाना भी ठीक से नहीं खा रहे और न ही घर से बाहर निकल रहे हैं। बच्चों को बार-बार समझा रहे हैं लेकिन बच्चे गुमसुम हैं। अब मुझे अपने बच्चों की चिंता खाए जा रही है।

भाई को मलाल, काश छोटे को रोक लेता

मृतक हेमंत से 3 साल बढ़ा भाई 13 वर्षीय बलवंत जोशी बताता है कि मंदिर जाने से पहले उसने हेमंत से कहा था कि थोड़ा रुक जाओ मैं भी चलता हूं लेकिन हेमंत चला गया। बलवंत ने बताया कि मैं भी मंदिर जाने वाला था कि तभी खबर मिली कि मंदिर के पास दीवार गिर गई। मौके पर पिता के साथ गया तो उसका भाई घायल था। पापा उसे लेकर अस्पताल चले गए, हम लोग भाई का हालचाल जानने पापा को फोन लगाते रहे, लेकिन भाई की मौत हो गई। बलवंत को मलाल है कि काश वह अपने छोटे भाई को रोक लेता।

फूट-फूट कर रो रहीं चार बहनें, इकलौता भाई छीन लिया

8 वर्षीय देवराज साहू 4 बहनों में इकलौता भाई था। सावन माह में भाई के अचानक दुनिया से चले जाने से उसकी बहनें फूट-फूट कर रो रहीं हैं। पिता गोविंद ने बताया कि सबसे छोटा होने के कारण देवराज पर बहनें जान छिडक़तीं थीं। घटना के बाद से बेटियों और पत्नी को संभालना मुश्किल हो रहा है। देवराज के जाने के बाद परिवार टूट गया है। बहन विनीता साहू ने बताया कि हम अपना दर्द कैसे बयां करें। छोटे भाई के जाने के बाद मानो हमारे परिवार की दुनिया ही उजड़ गई है। रक्षाबंधन क्या अब हमारा हर त्योहार फीका होगा।

पति की 4 साल पहले मौत, बेटा ने भी साथ छोड़ा

मृतक प्रिंस के पिता अशोक साहू ने 4 साल पहले सुसाइड कर लिया था। बेटे की परवरिश करने मां चिप्स-कुरकुरे बेचकर प्रिंस को पढ़ा रही थीं। पति के जाने के बाद मां का आसरा प्रिंस था। हादसे के बाद मां टूट गई है और वह बेसुध हैं। परिवार के अन्य लोग उसे संभाल रहे हैं। प्रिंस की एक बहन भी है, जिसे भाई के अचानक दुनिया से चले जाने के बाद गहरा सदमा बैठ गया है। परिजन ही नहीं पूरा नगर प्रिंस के जाने के बाद संवेदनाएं प्रकट कर रहा है। सभी की जुबान पर एक ही तकलीफ है कि भगवान ने मां का एकमात्र सहारा छीन लिया।