
Paras Vidya Vihar School staff Wrong move from innocent girl
स्कूल के नाम पर सहम जाती थी नर्सरी की बच्ची, पैरेंट्स ने डांटा तो बताया- टॉयलेट में गंदी हरकत करते हैं अंकल
पारस विद्या विहार स्कूल : प्रबंधन की अनसुनी पर भड़के अभिभावकों ने लगाया जाम, पुलिस ने कर्मचारी को किया गिरफ्तार, मासूमों की सुरक्षा में बड़ी लापरवाही
सागर. नर्सरी की मासूम छात्रा से छेड़छाड़ का मामला दूसरे दिन गुरुवार को भी गरमाया रहा। अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर आशंकित अभिभावक सुबह से ही स्कूल पहुंच गए और डायरेक्टर से मिलने की जिद को लेकर अड़े रहे। स्कूल में हंगामे की स्थिति की सूचना पर सीएसपी चार थानों की पुलिस लेकर पहुंचे और दोपहर २ बजे तक स्कूल पुलिस के पहरे में रहा। इस बीच महिला एवं विकास विभाग के पीएस के निर्देश पर विभाग के अधिकारियों की एक टीम घटनाक्रम और कार्रवाई की जानकारी लेने स्कूल पहुंची। आक्रोशित अभिभावकों के न मानने पर वहां सिटी मजिस्ट्रेट-तहसीलदार पहुंचे और उनके बयान दर्ज कराए। अभिभावकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सुरक्षा इंतजाम कड़े करने, स्कूल में पुरुष कर्मचारी न रखने सहित अन्य मांगों को लेकर अधिकारियों की मौजूदगी में स्कूल के डायरेक्टर से करीब आधे घंटे तक चर्चा भी की। उधर गुरुवार दोपहर बाद पुलिस ने प्रकरण की विवेचना में अभिभावकों के बयान दर्ज करते हुए बुधवार को गिरफ्तार कर्मचारी देवकीनंदन अहिरवार को कोर्ट में पेश कर उसे जेल भेज दिया।
तिली क्षेत्र स्थित पारस विद्या विहार स्कूल में तीन साल की मासूम बच्ची से कई दिनों से अशोभनीय हरकत करने वाले कर्मचारी देवकीनंदन और स्कूल प्रबंधन की चुप्पी पर गुरुवार को भी अभिभावकों का गुस्सा फूटा। स्कूल लगने के कुछ ही घंटे बाद अभिभावक वहां पहुंचने लगे। सभी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर आशंकित थे और स्कूल प्रबंधन से मिलकर सुरक्षा की ग्यारंटी लेने की मांग कर रहे थे। स्कूल में उन्हें प्रवेश से रोकनेऔर फिर स्कूल के डायरेक्टर के न मिलने से गुस्साए अभिभावक भडक़ गए। कुछ लोगों ने तो स्कूल परिसर में ही नारेबाजी शुरू कर दी।
खबर लगते ही पहले सिविल लाइन टीआई संगीता सिंह, गोपालगंज टीआइ अभिषेक वर्मा पहुंचे और कुछ ही देर बाद सीएसपी आरडी भारद्वाज, कैंट टीआई नीलेश दोहरे व महिला थाना टीआइ रीता सिंह को लेकर पहुंच गए। कुछ ही देर में स्कूल का कैंपस और मेन गेट पुलिस केपहरे में घिर गया। हंगामा कर रहे अभिभावकों को समझाते हुए उनके बयान दर्ज किए। जिसमें अभिभावकों ने स्कूल की सुरक्षा, सीसीटीवी कैमरे लगाने और उसे देखने की सुविधा दिए जाने के साथ ही स्कूल की प्राचार्या के व्यवहार पर भी आपत्ति दर्ज कराई।
इस बीच सीएसपी राजेन्द्र सिंह, तहसीलदार, ननि उपायुक्त प्रणय कमल खरे भी स्कूल पहुंच गए और अभिभावकों से बात की। अभिभावकों की डायरेक्टर से मिलने की जिद पर अधिकारियों की उपस्थिति में एक प्रतिनिधिमंडल ने अपनी समस्याओं को प्रबंधन के सामने रखा और बच्चों की सुरक्षा की ग्यारंटी मांगी। प्रतिनिधिमंडल में शामिल महिलाओं की डायरेक्टर के साथ कई बार तीखी बहस भी हुई जिसे बीच-बीच में अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर रोका।
शिक्षा विभाग के अफसरों की नहीं सुध, महिला एवं बाल विकास विभाग के पीएस ने लिया संज्ञान :-
शहर के निजी स्कूल में कड़ी निगरानी के बीच तीन साल की मासूम छात्रा के साथ छेड़छाड़ का मामला मीडिया में उछलने के बाद पुलिस-प्रशासन हरकत में आ गए लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी बेसुध ही बने रहे। दोपहर १२ बजे जब पुलिस और प्रशासन के तमाम अफसर स्कूल में हो रहे हंगामे की सूचना पर वहां डेरा जमाए हुए थे तब भी शिक्षा विभाग का कोई अफसर वहां नहीं पहुंचा। बस जिला शिक्षा अधिकारी तीन सदस्यीय जांच दल बनाने और शाम तक रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपने की बयानबाजी कर भूल गए। जबकि १.३० बजे छुट्टी होने के समय तक उनकी जांच टीम पारस विद्या विहार नहीं पहुंची। वहीं इस मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग के पीएस ने भोपाल से संज्ञान लिया। उनके आदेश पर विभाग की जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी सुभाषिनी राम, परियोजना अधिकारी राहतगढ़ अनुराग दुबे व परियोजना अधिकारी गढ़ाकोटा शीतल पटेरिया की टीम घटनाक्रम और कार्रवाई की जानकारी जुटाने स्कूल पहुंची और अभिभावकों व प्रबंधन से चर्चा की।
कई दिनों से स्कूल जाने के नाम से डरी-सहमी मासूम को परिजनों ने बुधवार को स्कूल भेजना चाहा, तब उसने कर्मचारी की हरकत के बारे में बताया। बच्चों की सुरक्षा में चूक से आक्रोशित अभिभावकों ने स्कूल के सामने हंगामा कर रास्ता जाम कर दिया। पुलिस के साथ तीखी बहस भी हुई। चार थानों की पुलिस काफी देर तक वहां तैनात रही। आरोपी कर्मचारी की पहचान के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ केस दर्ज कर दोपहर में उसे हिरासत में ले लिया।
टाल-मटोल करने पर पुलिस को दी खबर
तिली क्षेत्र स्थित पारस विद्या विहार की नर्सरी कक्षा की छात्रा करीब दो सप्ताह से स्कूल जाने के नाम पर सहम जाती थी। परिजनों जैसे ही स्कूल जाने उसे तैयार करने वह कतराने लगती। बुधवार को जब बच्ची की मां ने उसे डांट-डपकर कर स्कूल भेजना चाहा तो मासूम ने बताया कि जब वह टॉयलेट जाती है तो स्कूल के एक अंकल गंदी हरकत करते और डराते हैं। बच्ची द्वारा पूरी बात बताने के बाद गुस्साए माता-पिता सुबह ही उसे लेकर स्कूल पहुंच गए और स्कूल प्रबंधन को इसकी जानकारी देकर उस कर्मचारी की पहचान करने को कहा। उनकी शिकायत पर स्कूल प्रबंधन के लोग टाल-मटोल करते दिखे तो उन्होंने पुलिस को खबर कर दी।
कार्रवाई पर शंका के बाद हंगामा
सिविल लाइन टीआइ संगीता ङ्क्षसह ने स्कूल पहुंचने के बाद पहले मासूम के माता-पिता और फिर प्राचार्या रितु जडि़या से बात कर सीसीटीवी फुटेज लिए। टीआइ जब थाने जाने लगीं तो परिजनों ने कार्रवाई में टालमटोल की शंका के चलते हंगामा कर जाम लगा दिया। परिजन व अन्य अभिभावक मासूम के साथ अशोभनीय हरकत करने वाले कर्मचारी को सामने लाने की बात पर अड़े थे, लेकिन पुलिस व्यवस्था गड़बड़ाने की आशंका के चलते उसे सीधे लोगों के सामने नहीं लाना चाहती थी। पुलिस ने संदेही को थाने पहुंचाया व फुटेज वाट्सऐप के जरिए भेजकर बच्ची से पहचान की पुष्टि कर देवकीनंदन अहिरवार (३२) पर अपराध दर्ज कर लिया।
मामला दबाने के आरोप
सड़क पर हंगामा कर रहे आक्रोशित परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर मासूम के साथ हुई छेड़छाड़ जैसी घिनौनी हरकत को दबाने के आरोप लगाए हैं। अभिभावकों का कहना था कि पूर्व में भी इस तरह की शिकायत बच्चों द्वारा की जाती रही हैं लेकिन स्कूल पहुंचकर आपत्ति दर्ज कराने पर बच्चे को स्कूल से निकालने की धमकी देते हुए दबाव बनाकर चुप करा दिया जाता है। स्कूल में बच्चों से बेरहमी से मारपीट के भी कुछ मामले सामने आ चुके हैं।
जांच के बाद करनी थी कार्रवाई
स्कूल संचालक अभिषेक जैन के अनुसार स्कूल प्रबंधन बच्चों और अभिभावकों के साथ है। सुबह परिजनों की शिकायत पर पुलिस स्कूल पहुंची थी। संदेहियों को बच्ची के सामने लाने पर वह पहचान नहीं सकी। स्कूल से सीसीटीवी फुटेज लिए गए, लेकिन उनकी पड़ताल के बिना ही संस्था में २००२ से कार्यरत देवकीनंदन पर केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बच्चियों के टॉयलेट के सामने तैनात रहने वाली महिला कर्मचारियों से भी पूछताछ करना उचित नहीं समझा। जांच पूरी करने के बाद पुलिस को यह कार्रवाई करनी चाहिए थी यह जल्दबाजी है।
विभाग भी करेगा जांच
सिविल लाइन थाना टीआई संगीता सिंह के अनुसार पारस विद्या विहार स्कूल की नर्सरी की छात्रा से कर्मचारी द्वारा छेड़छाड़ की शिकायत मिली थी। पुलिस ने परिजन, स्कूल प्रबंधन व मासूम से भी बात कर अपराध दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया है। लोक शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक आरएन शुक्ला के मुताबिक स्कूल में ऐसी घटना सामने आई है तो उसकी विधिवत जांच की जाएगी। डीइओ से बात करके जांच के आदेश देंगे।
यह करें अभिभावक
ऐसे स्कूल में ही एडमिशन कराएं, जिसकी घर से दूरी 20 से 25 मिनट की हो। सुनिश्चित कर लें कि स्कूल के सभी क्लास, हॉल, लॉबी और गार्डन एरिया में भी कैमरे लगे हों। सभी कैमरे काम करते हों।
बच्चे के स्कूल पहुंचने पर उसकी हाजिरी या क्लास टीचर से
सुनिश्चित कर लें कि बच्चा सुरक्षित स्कूल पहुंच गया है।
बच्चे को समझाएं कि स्कूल में कहीं भी अकेले ना जाएं। हमेशा किसी के साथ रहें। जहां भी जाएं अपने दोस्तों और क्लास टीचर को बताएं।
अपने बच्चे को गुड और बैड टच में फर्क अंतर जरूर बताएं। यह भी सिखाएं कि किसी बुरे बर्ताव पर कैसे शोर मचाना है, भागना है।
स्कूल का बाथरूम, टॉयलेट कितना सेफ है इस पर नजर रखें।
अपने स्तर पर यह भी जांचते रहें कि कहीं बच्चों का टॉयलेट
बड़े तो इस्तेमाल नहीं कर रहे।
संबंधित संस्था में कितने गार्ड हैं, चपरासी हैं। उनका विधिवत पुलिस वेरिफिकेशन हुआ है या नहीं। टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ का
भी पुलिस वेरिफिकेशन है या नहीं की भी पड़ताल करें।
यदि बच्चा कोई छोटी भी शिकायत कर रहा हो तो उसे कतई नजरअंदाज न करें। संबंधित टीचर, स्कूल प्रबंधन से बात करें।
बच्चे को ना कहना सिखाएं कि उसे कोई किस ना करे, ना गले लगाए।
बच्चे को बताएं कि उनके प्राइवेट पाट्र्स को कोई नहीं छू सकता।
निजी अंगों की तस्वीर भी बच्चों को दिखाना क्राइम है।
यदि बच्चा आपसे कोई बात छुपा रहा है तो उससे बात करें।
जानने की कोशिश करें कि वह ऐसा क्यों कर रहा है।
एक्सपर्ट व्यू : छोटे शहरों में बढ़ रहीं वारदातें
म नोचिकित्सक डॉ. राजीव जैन ने बताया कि बड़े शहरों में अब छोटी बच्चियों के साथ छेड़छाड़ जैसी घटनाएं ज्यादा सामने आती थीं। अब वही हमें यहां दिखाई दे रहीं है। यह मानसिक विकृतियां होती है, जो कभी-कभी हावी हो जाती हैं। बिना सोचे-समझे ऐसी वारदातों को अंजाम दे दिया जाता है। इसके पीछे इंटरनेट भी एक बड़ा कारण हैं। इसमें अपलोड किए जा रहे वीडियो पर सभी कंटेंट मौजूद हैं जिन्हें देखकर भी लोग ऐसे कृत्य कर रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चों के हाथ में मोबाइल थमा दिया जाता है। ऐसे में दिमाग में मानसिक विकार आते हैं। स्कूलों में अपने बच्चों को लेकर पैरेन्ट्स के लिए सचेत रहना होगा।
Published on:
06 Dec 2018 02:46 pm
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