
नॉन क्लीनिकल विभागों में 13 सीटें पीजी की मंजूर, लेकिन इस साल मात्र 3 सीट ही भर पाईं
सागर. बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के ४ नॉन क्लीनिकल विभागों में इस साल से पीजी शुरू हो गई है। लेकिन इनमें से सिर्फ एक विभाग की ३ सीटों पर दाखिले हो सके हैं। शेष ३ विभागों में सभी १० सीटें खाली रह गई हैं। जानकारों की माने तो एेसा इसलिए हुआ है क्योंकि बीएमसी में पीजी की शुरूआत हुई है। नया कॉलेज होने के कारण पीजी करने वाले इक्छुक डॉक्टरों ने कॉलेज को नहीं चुना है। बता दें कि कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग को मिली ४ सीटों में ३ सीट भर चुकी है। पीजी करने वाले डॉक्टरों ने ज्वाइन भी कर लिया है। हालांकि प्रबंधन को उम्मीद है कि अगले साल से नॉन क्लीनिकल के सभी ४ विभागों में सीटें भरना शुरू हो जाएंगी।
-४ ने वापस लिया दाखिला
जानकारी के अनुसार नीट प्रीपीजी में चयनित ७ डॉक्टरों ने सागर बीएमसी में दाखिला लिया था। लेकिन साथ ही उन्होंने अन्य कॉलेजों के लिए अपग्रेड ऑपशन चुना था। बताया जाता है कि एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, फार्मोक्लॉजी के लिए भी आवेदन किए थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी पसंद के अन्य मेडिकल कॉलेज चुन लिया। इस वजह से ४ सीटें खाली रह गईं।
-इन विभागों को मिली थी पीजी की सीट
विभाग सीट भरी
एनाटॉमी - ०3 ००
फार्मोक्लॉजी- ०3 ००
फिजियोलॉजी- ०3 ००
कम्युनिटी मेडिसिन- ०4 ०३
-विवि के स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी का पीएसएम में हुआ चयन
डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विवि में संचालित स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. अभिषेक जैन का चयन पीजी में हुआ है। खासबात यह है कि स्टडी से लंबे समय से दूर होने के बाद भी उन्होंने कम समय में पीजी की तैयारी की और इसी साल उनका चयन पीजी में हो गया। उन्होंने बीएमसी के कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग को चुना है और दाखिला लेकर पीजी कर रहे हैं। विवि से उन्होंने स्टडी लीव ले रखी है। वहीं, भोपाल से शैफाली जैन और तिरपुरा से अभिजीत ने भी पीएसएम में दाखिला लिया है।
-रहने की नहीं व्यवस्था
बीएमसी में पीजी भले ही शुरू हो गई हो, लेकिन यदि पीजी करने वाले डॉक्टरों की सुविधाओं की बात की जाए तो अभी उनके लिए यहां रहने की व्यवस्था नहीं है। ३ में से एक डॉक्टर गेस्ट हाउस में रहने मजबूर हैं। वहीं, दूसरे को बाहर किराय का घर लेकर रहना पड़ रहा है। हालांकि प्रबंधन का कहना है कि उनके लिए एसआर क्वार्टर दिए जाएंगे। यह प्रक्रिया चल रही है।
पीजी के लिए बीएमसी नया कॉलेज है। चयनित डॉक्टर सबसे पहले पुराने कॉलेज ही चुनते हैं। वैसे भोपाल-इंदौर मेडिकल कॉलेज में नॉन क्लीनिकल विभागों की सीटें खाली रह जाती हैं। अगले साल से उम्मीद है सभी सीटें भरने की।
डॉ. जीएस पटेल, डीन बीएमसी
Published on:
14 Jul 2019 08:03 am
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