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मां के जयकारों के साथ निकले चल समारोह, मोतीचूर नदी में की प्रतिमाएं विसर्जित

देर रात तक चला विसर्जन, सड़कों पर लगा जाम, झांकियां देखने पहुंचे हजारों लोग

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A procession took place with the cheers of Mother

शहर से निकलती हुईं झांकियां

बीना. नौ दिनों तक शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में शक्ति की भक्ति में भक्त लीन रहे और दशहरे पर शनिवार को हवन, पूजन कर प्रतिमाओं का विसर्जन धूमधाम से किया गया। विसर्जन के लिए मोतीचूर नदी पर प्रशासन ने भी चाक चौबंद व्यवस्थाएं की गई थीं, लेकिन सर्वोदय चौराहे से मोतीचूर नदी तक जगह-जगह जाम लगने से वाहन चालक परेशान हुए।
हवन, पूजन के बाद दोपहर से चल समारोह शुरू हो गए थे। ट्रैक्टर-ट्रॉली और ट्रक में माता रानी की झांकी सजाकर बैंड बाजे, डीजे पर थिरकते हुए श्रद्धालु चल समारोह में निकले। शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए झांकियां मोतीचूर नदी पहुंची, जहां क्रेन से प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। नदी पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था की गई थी और तैराकों ने ही प्रतिमाओं का विसर्जन किया। सुरक्षा की दृष्टि से अन्य व्यक्तियों को घाट पर नहीं जाने दिया गया। मुख्य मार्गों पर झांकियां देखने वालों की भीड़ लगी रही। शहर में 100 से ज्यादा प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ। विसर्जन को लेकर नदी घाट पर साज-सज्जा भी की गई थी, जहां फब्बारों के साथ-साथ लाइटिंग की गई थी, जो आकर्षण का केन्द्र रही। घाट पर एसडीएम देवेन्द्र प्रताप सिंह, एसडीओपी नितेश पटेल आदि अधिकारियों ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

ग्रामीण क्षेत्रों में निकले चल समारोह
ग्रामीण क्षेत्रों में भी देवी प्रतिमाओं का विसर्जन धूमधाम से किया गया। भागनढ़, बसाहरी, खिमलासा, कंजिया सहित अन्य ग्रामों में चल समारोह निकाले गए। बड़ी संख्या में ग्रामीण माता रानी को विदाई देने पहुंचे थे।

ट्राफिक व्यवस्था हुई फेल
दशहरे पर प्रशासन ने ट्राफिक व्यवस्था को लेकर पहले से कोई योजना नहीं बनाई थी, जिससे चार पहिया वाहन निकलते रहे और जाम की स्थिति बनी रही, जिससे वाहन चालक परेशान होते रहे। सबसे ज्यादा सर्वोदय चौराह और आगासौद रोड पर परेशानी हुई।