
Removal of malnutrition makes this tree work tonic
सागर. पोषक तत्वों के मामले में सहजन या मुनगा बेहद गुणकारी है। देश सहित बुंदेलखंड में यह वृक्ष बहुतायत में पाया जाता है, लेकिन इसकी पहचान ना होने के कारण इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। आधुनिकीकरण की आपाधापी में शहरों से तो यह गायब ही हो रहा है। कुपोषण को मिटाने में मुनगा अहम भूमिका निभा सकता है।
महिला बाल विकास विभाग ने मुनगा की उपयोगिता को समझ कर इसे कुपोषण के शिकार परिवार के आंगन तक इसे पहुंचाने के लिए अभियान शुरू किया है। संभाग में कुपोषण की मुक्ति के लिए, मध्यम एवं अतिकुपोषित बच्चों के परिवारों के आंगन में मुनगा से सुपोषण अभियान आरंभ किया जा रहा है। इसी के तहत ६ दिसंबर को सागर में संभागस्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन सुबह 11 बजे से कमिश्नर सभाकक्ष में किया जा रहा है। शुभारंभ संभागायुक्त आशुतोष अवस्थी करेंगे। कार्यशाला में संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर्स, जिला पंचायतों सीईओ और अन्य विभागों के संयुक्त संचालक एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहेंगे। विभाग की संयुक्त संचालक शशि श्याम उइके ने अधिकारियों से निर्धारित समय पर उपस्थित होने का अनुरोध किया है।
बुंदेलखंड में बहुतायत से मिलता है मुनगा
सहजन का वनस्पितिक नाम मोरिंगा ओलिफेरा है। इस पेड़ के विभिन्न भाग अनेक पोषक तत्वों से भरपूर हैं। बुंदेलखंड में मुनगा की फल्लियों को दाल व कढ़ी में डाल कर खाया जाता है। इसकी पत्तियों और फली की सब्जी भी बनती है।
औषधीय गुणों से भरपूर
जानकारों के अनुसार मुनगा को अंग्रेजी में ड्रमस्टिक कहा जाता है। इसका वनस्पति नाम मोरिंगा ओलिफेरा है। सेंजन, मुनगा या सहजन आदि नामों से जाना जाने वाला सहजन औषधीय गुणों से भरपूर है। इसके अलग-अलग हिस्सों में 300 से अधिक रोगों के रोकथाम के गुण हैं। इसमें ९२ तरह के मल्टीविटामिन्स, 46 तरह के एंटी आक्सीडेंट गुण, 36 तरह के दर्द निवारक और 18 तरह के एमिनो एसिड मिलते हैं।
Published on:
07 Dec 2017 11:19 am
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