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Mumps virus कोरोना की तरह अब ये वायरस कर रहा बच्चा पर हमला

मौसम बदलते ही कोरोना की तरह बच्चों में फैलती है बीमारी
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सागर

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Murari Soni

Apr 02, 2024

कोरोना की तरह अब ये वायरस कर रहा बच्चा पर हमला

कोरोना की तरह अब ये वायरस कर रहा बच्चा पर हमला

सागर. बच्चों में मम्प्स यानी गलसुआ बीमारी का खतरा बढ़ गया है। अस्पतालों में बच्चे गले की सूजन और बुखार के साथ पहुंच रहे हैं। सामान्यत: बीमारी बच्चों के लिए ज्यादा घातक नहीं होती लेकिन फिर भी कुछ केस में बच्चों को भर्ती कराने की नौबत आ रही है।

जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज गलसुआ बीमारी से ग्रसित बच्चे रोज पहुंच रहे हैं। निजी अस्पतालों में भी परिजन इलाज करा रहे हैं। डॉक्टर्स की माने तो यह बीमारी भी कोरोना वायरस की तरह मम्प्स वायरस से फैलती है इसलिए परिजनों को सावधानी बरतनी चाहिए।

जिला अस्पताल के बच्चा रोग विशेषज्ञ डॉ. ब्रजेश यादव की माने तो गलसुआ या मम्प्स एक प्रकार का वायरल इन्फेक्शन होता है, जो मुख्य रूप से लार ग्रंथियों को प्रभावित करता है। गलसुआ का मुख्य लक्षण लार ग्रंथियों में सूजन होती है। लक्षण आने के बाद ये 14 से 18 दिनों तक रहते हैं। 7-8 दिन में बीमारी खत्म हो जाती है, लेकिन कुछ केस क्रिटिकल हो जाते हैं और बच्चों को आइसीयू में शिफ्ट करना पड़ सकता है। जिला अस्पताल में इस सीजन में 8-10 केस सामने आ चुके हैं। वहीं मेडिकल कॉलेज डॉ. आशीष जैन की माने तो बच्चा वार्ड में एकाएक मम्प्स के केस बढ़े हैं। 15 दिन से रोज 1-2 केस आ रहे हैं। 5-6 बच्चों को भर्ती भी करना पड़ा है।

बच्चा वार्ड में ये हो रहा गलसुआ का इलाज-

डॉक्टर्स ने बताया कि गलसुआ बीमारी से निपटने के लिए बच्चों को टीकाकरण होता है। जो 9 माह से लेकर 18 माह तक लगाया जा सकता है। इसके लिए कोई विशेष उपचार नहीं है। सूजन को कम करने के गर्म व ठंडी चीजों से सिकाई के लिए बोला जाता है। दर्द के लिए पेनकिलर दी जा रहीं हैं। जब केस क्रिटिकल हो जाता है तो अक्सर बच्चे सुस्त पड़ जाते हैं, झटके आना, उल्टी से बच्चे गंभीर हालत में पहुंच सकते हैं।

बीमार बच्चे को स्कूल न पहुंचाएं, सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी-

डॉक्टर्स की माने तो इस वायरस से संक्रमित होने के बाद बच्चों में बीमारी के लक्षण 2 से 3 सप्ताह में आ जाते हैं। जिसमें बच्चों को चबाने और निगलने में परेशानी होने लगती है।

चेहरे के एक तरफ या दोनों तरफ सूजन आ जाती है। वायरस से बचने के लिए परिजन सतर्क रहें क्योंकि यह वायरस कोरोना की तरह फैलता है। बच्चे में यदि इस तरह के लक्षण हैं तो उसे स्कूल में न भेजें। स्कूल प्रबंधन को भी बीमार बच्चे की केयर के लिए उसे अवकाश देना चाहिए ताकि दूसरे बच्चों में इसका संक्रमण न फैले।

बच्चों में दिखे ये परेशानी तो डॉक्टर्स से संपर्क करें-

-तेज सिरदर्द

-बुखार

-गर्दन में अकड़न

-गाल व जबड़े में दर्द-सूजन

- बच्चा वार्ड में कुछ दिनों से मम्प्स वायरस से संक्रमित बच्चे पहुंच रहे हैं। कुछ बच्चे काफी सुस्त हो गए थे, एक को झटके और उल्टियां आ रहीं थी। ऐसी स्थिति में बच्चों को आइसीयू में शिफ्ट करना पड़ा। झटके की दवा, एंटीबायोटिक इंजेक्शन, ट्रिप चढ़ाई जाती है। लोग बीमारी को लेकर सतर्कता बरतें।-डॉ. आशीष जैन, विशेषज्ञ बीएमसी।

-केस न बिगड़े और बच्चा खाता-पीता रहे तो बीमारी ज्यादा घातक नहीं होती, लेकिन गले में सूजन की बजह से बच्चे खाना पीना छोड़ देते हैं। कभी-कभी केस क्रिटिकल हो जाता है। लक्षण आने पर बच्चों को स्कूल न भेजें और बीमार बच्चे से दूरी मेंटेन करना समझदारी है।

-डॉ. ब्रजेश यादव, बच्चा रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल।