
वर्तमान में पांच राज्यों में किसानों द्वारा तैयार की जा रही जैविक खाद को सप्लाई किया जा रहा है। किसान इस जैविक खाद के जरिए आर्थिक लाभ भी अर्जित करने लगे हैं। बुधवार को डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के नेतृत्व में वर्मी कम्पोस्ट को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला गांव मृगावली में आयोजित की गई। वर्मी कम्पोस्ट विशेषज्ञ रामसेवक कुशवाहा ने किसानों को तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विवि प्रशासन के सहयोग से उन्होंने 10 बैग की एक यूनिट के साथ वर्मी कम्पोस्ट यूनिट की शुरुआत की थी।
फील्ड ऑफिसर मोहित तिवारी ने कहा कि हर किसान को जानकारी होती है कि वर्मी कम्पोस्ट कैसे तैयार किया जाता है, लेकिन छोटी-छोटी बातों का समय पर ध्यान न देने के कारण बेहतर उत्पादन नहीं ले पाते हैं, जिससे उसका लाभ किसानों को नहीं मिल पाता है। उन्होंने किसानों को खाद तैयार करने की बरीकियों की जानकारी दी। प्रशिक्षण में पुष्पेंद्र सिंह, घनश्याम शर्मा, अवध किशोर शर्मा, ज्ञान चंद्र, माधव प्रसाद, गोकुल, रतीराम साहू, अशोक रानी सेन समेत अन्य किसान मौजूद रहे।
80 प्रतिशत किसान बना रहे जैविक खाद
मृगावली में जब इस यूनिट की शुरुआत हुई तो लोग उतने जागरुक नहीं थे लेकिन जैसे ही उन्होंने जैविक खाद का व्यवसायिक उपयोग समझा तो अब वे बढ़-चढ़कर इस काम में हिस्सा ले रहे हैं। 400 आबादी वाले इस गांव में 90 परिवार हैं, जिनमें से 80 प्रतिशत किसान इस पेशे से जुड़ गए हैं और अपने खेतों में भी शत-प्रतिशत जैविक खाद व खेती को बढ़ावा दे रहे हैं।
Published on:
29 Feb 2020 05:10 pm
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