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अब स्कूल स्तर से ही छात्र-छात्राओं को रोजगार के हुनर सिखाए जा रहे हैं। इसकी शुरुआत पीएमश्री स्कूलों से हो गई है। यहां छात्र-छात्राओं को पूजन-हवन सामग्री, फूलबत्ती, आंवला कैंडी, आंवला का मुरब्बा और इसके साथ कबाड़ से जुगाड़ के तहत कई आर्ट एंड क्राॅफ्ट की वस्तुओं का निर्माण करना सिखाया जा रहा है। पीएमश्री स्कूल में तेजस्वी योजना के तहत बच्चों को ट्रेनिंग दी जा रही है।
स्कूलों में एआई के दौर में रोबोटिक चीजें सीखने के साथ लघु उद्योग पर ध्यान दिया जा रहा है। पीएमश्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरारू के प्राचार्य सतीश चंद्र पांडे ने बताया कि एआई के दौर में कला का महत्व बढ़ जाएगा। विद्यार्थियों के लिए हवन सामग्री, मोमबत्ती, आंवला कैंडी, बेकरी व कबाड़ से जुगाड़ के तहत कई डेकोरेटिव सामग्री बनाना सिखाई है। कबाड़ की सामग्री से ज्वेलरी बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके साथ भगवान की तरह-तरह की पोशाक बनाना भी सिखाया है। प्रशिक्षक के बाद विद्यार्थी घर पर भी लघु उद्योग शुरु कर सकते हैं।
स्कूल में बच्चों को पढ़ते-पढ़ते कौशल विकास की ट्रेनिंग दी जा रही है। यह नया प्रयोग शुरू हुआ है, जिसके तहत सप्ताह में हम एक दिन ऐसी क्लास लगाते हैं, जिसमें बच्चों को लघु उद्योग की ट्रेनिंग दी जाए। इससे बच्चे हवन सामग्री, मोमबत्ती, भगवान के ऊनी वस्त्र सहित कई तरह की सामग्री बनाना सीख गए हैं। - अनीता गुप्ता, मार्गदर्शक शिक्षक
हमने स्कूल में पढ़ाई के साथ कई तरह की सामग्री को बनाना सीख लिया है। सीखने के बाद घर पर भी माता-पिता को जानकारी दी है। अब त्योहार पर हम घर पर ही हवन सामग्री और भगवान के वस्त्र आदि बना रहे हैं। - नंदनी कुशवाहा, छात्रा
Published on:
05 Apr 2025 05:05 pm
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