सागर

अभयारण्य के कारण नहीं होगा किसी गांव का विस्थापन, मंजूरी के लिए केंद्र को भेजा प्रस्ताव

डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम से होगा अभयारण्य का नाम, उत्तर वन मंडल के तहत आने वाले बहरोल, बरायठा, बिनेका के जंगलों में जल्द देखने मिलेंगी वन्यजीवों की अटखेलियां, टाइगर का भी हमेशा रहा मूवमेंट  

2 min read
Feb 13, 2020
अभयारण्य के कारण नहीं होगा किसी गांव का विस्थापन, मंजूरी के लिए केंद्र को भेजा प्रस्ताव

सागर. प्रदेश के सबसे बड़े अभयारण्य नौरादेही को लेकर तो सागर जिला देश भर में अपनी पहचान पहले ही स्थापित कर चुका है, इसके बाद अब उत्तर वन मंडल क्षेत्र में एक और अभयारण्य बनाने का मसौदा तैयार हो चुका है। वन विभाग द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव में अभयारण्य का नाम डॉ. भीमराव आंबेडकर रखा गया है। इसके अलावा सबसे अच्छी और खास बात यह है कि अभयारण्य बनाने के लिए यहां पर किसी भी गांव का विस्थापन करने की जरूरत नहीं होगी। वन विभाग ने अभयारण्य बनाने के लिए क्षेत्र का 264 वर्ग किलो मीटर का क्षेत्र शामिल किया है। इस प्रस्ताव को बनाने के लिए छह माह से प्रस्ताव बनाने को लेकर तैयारी चल रही थी और कुछ समय पहले पूर्व मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी द्वारा प्रस्ताव मंजूरी के लिए भारत सरकार को भेज दिया गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो जल्द ही उत्तर वन मंडल में भी सैलानियों को वन्यजीवों की अटखेलियां देखने को मिलेगी।

यह क्षेत्र होगा अभयारण्य में शामिल
डॉ. भीमराव आंबेडकर अभयारण्य के नाम से शाहगढ़ और बंडा वन परिक्षेत्र के तहत आने जिस जंगली क्षेत्र को शामिल किया जा रहा है। उसमें मुख्य रूप से बहरोल, धामोनी, बरायठा, बिनेका, कानीखेड़ी, बीला, तारपोह, रूरावन सहित अन्य जंगली क्षेत्र है। अभयारण्य क्षेत्र की अगर मंजूरी मिल जाती है तो पर्यटकों के लिए घूमने का मुख्य गेट ग्राम बरेठी में बनाया जाएगा। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की ज्यादा उम्मीद इसलिए भी है, क्योंकि जिस क्षेत्र को चुना गया है वहां पर चार बड़ी नदियां हैं। जिसमें सबसे बड़ी धसान नदी है, जो बहरोल से लेकर बरायठा तक के जंगली क्षेत्र को कवर करती है। बाकरई नदी बिनेका, लांच नदी तारपोह और बीला नदी बीला और कानीखेड़ी क्षेत्र के जंगल में रहने वाले वन्यप्राणियों के लिए उपयुक्त रहेंगी।

टाइगर का भी रहता है मूवमेंट
अभयारण्य के लिए चुने गए वनक्षेत्र में बड़ी संख्या में वन्यजीव मौजूद हैं। जिसमें तेंदुआ, लकड़बग्गा, हिरण, चीतल, चिंकारा, नीलगा, भालू, सियार, जंगली सुअर, मगरमच्छ, मोर, जंगली बिल्ली, खरगोस सहित अन्य शाकाहारी व मासाहारी वन्यजीव हैं। इसके अलावा यह क्षेत्र हमेशा बाघों का मूवमेंट रहा है। हालही में करीब 10 पहले पन्ना टाइगर रिजर्व के टी-3 बाघ के मूवमेंट वाले क्षेत्रों के निरीक्षण पर निकली टीम भी इन वन्यक्षेत्रों में पहुंची थी।

केंद्र सरकार से मंजूरी के लिए भेजा है
राज्य सरकार ने प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार से मंजूरी के लिए भेजा है। जिस वनक्षेत्र को अभयारण्य के रूप में विकसित करना है वहां किसी गांव को विस्थापित नहीं करना पड़ेगा। वन्यजीवों की संख्या पहले ही पर्याप्त है, साथ ही इस क्षेत्र में चार बड़ी नदियां गुजरी हैं।
प्रशांत कुमार, डीएफओ, उत्तर वन मंडल

Published on:
13 Feb 2020 07:01 am
Also Read
View All

अगली खबर