
the history of 22 december: the history of smallest day 22 december in hindi latest news
सागर. 22 दिसंबर का दिन साल का सबसे छोटा दिन होगा। शुक्रवार को सूर्य पृथ्वी के सबसे निकट होगा और उसकी किरणें मकर रेखा पर पड़ेंगी। पृथ्वी के सबसे पास होने की वजह से सूर्य की मौजूदगी आठ घंटे ही रहती है, जिसके अस्त होने के बाद 16 घंटे की साल की सबसे लंबी रात होती है। यही वजह है कि २२ दिसंबर को दिन छोटा होगा और 23 दिसंबर से बड़े दिन की शुरुआत होगी।
यह है वजह
सूर्य मकर रेखा के लंबवत होने की स्थिति और पृथ्वी के सबसे नजदीक होने के कारण यह स्थिति उत्तरी गोलाद्र्ध में रहती है। वैज्ञानिक दृष्टि से पृथ्वी को उत्तरी और दक्षिणी गोलाद्र्ध में बांटा गया है। यही कारण है कि दिन करीब आठ घंटे और रात 16 घंटे की होगी।
21 जून को साल का बड़ा दिन
केंद्रीय विवि में भूगोलवेत्ता डॉ. आरपी मिश्रा ने बताया कि साल के चार दिन ऐसे होते हैं, जिन्हें खगोलीय घटनाओं के अनुसार खास माना जाता है। जिनमें एक 22 दिसंबर है जो साल का सबसे छोटा दिन होता है। इसे विंटर सोलस्टाइस के नाम से जाना जाता है।
कम आती हैं किरणें
दो दिन यह भी: 21 मार्च और 23 सितंबर को दिन और रात का समय बराबर होता है। क्योंकि सूर्य भूमध्य रेखा में होता है। 21 जून को साल का सबसे बड़ा दिन होता है। यह खगोलीय घटना नियत तिथि पर ही होती है।
उधर दक्षिणी गोलार्ध में होंगे लंबे दिन
इस समय सूर्य मकर रेखा के उपर है, जिसके चलते दक्षिणी गोलार्ध में अभी गर्मी का मौसम है। उत्तरी गोलार्ध में सूर्य की किरणें सीधी न पड़ते हुए आड़ी पड़ने के चलते ही यहां ठंड का मौसम है।
यह है दिसंबर दक्षिणायन
समूचे विश्व में दक्षिणायन एक साथ होता है। उत्तरी गोलार्ध पर सूर्य का झुकाव 23.5 डिग्री होता है। इस कारण यह साल का सबसे छोटा दिन बन जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस घटना के बाद से ही जाड़े का भी आरंभ हो जाता है।
Published on:
21 Dec 2017 07:40 pm

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