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गांव के लोगों ने पत्थर फेंके और बंदूक तान ली, बालविवाह को रोकने से पीछे नहीं हटी ज्योति

ओडिशा में लड़की का सौदा करके उसके मां-बाप यहां बेचने आ गए। 25 हजार में बेटी का सौदा कर दिया और बंडा के छापरी गांव में उसकी शादी होने लगी।

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सागर

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Reshu Jain

Jun 30, 2024

jyoti

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गांव के लोगों ने पत्थर फेंके और बंदूक तान ली, बालविवाह को रोकने से पीछे नहीं हटी ज्योति

सागर. ओडिशा में लड़की का सौदा करके उसके मां-बाप यहां बेचने आ गए। 25 हजार में बेटी का सौदा कर दिया और बंडा के छापरी गांव में उसकी शादी होने लगी। सूचना मिलने मैं छापरी गांव पहुंच गई। वो पल मेरे लिए सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण था। गाडी़ के सामने लड़की के परिवार की सभी महिलाएं लेट गईं। गांव के लोग पत्थर फेंकने लगे। समझ नहीं आ रहा था क्या करूं। बड़ी मुश्किल से घरवालों को समझाने के बाद बाल विवाह को रोक दिया। यह कहानी है सागर में विशेष किशोर इकाई की अधिकारी ज्योति तिवारी।
ज्योति तिवारी बुंदेलखंड में बाल विवाह की कुप्रथा रोकने में अहम भूमिका निभा रही हैं। ज्योति पिछले छ: वर्षों में 450 से ज्यादा बालिकाओं की शादियां रुकवा चुकी हैं। 2018 में पुलिस की विशेष किशोर इकाई का गठन हुआ और सागर की प्रधान आरक्षक ज्योति तिवारी को बाल विवाह रोकने और लड़कियों की मदद की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस काम में वे ऐसी रम गईं कि इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब वे हर विपरीत स्थिति में बालविवाह रोकने के लिए पहुंच जाती हैं।

कई बार गांव के लोगों ने पत्थर फेंके
ज्योति ने बताया कि बालविवाह रोकने के लिए उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता हैं। अधिकतर शादियां गांव में होती हैं और गांव के दबंग जान से मारने की धमकी देती हैं। उन्होंने बताया कि बांदरी क्षेत्र में दूसरा बाल विवाह रोकने गई थी। उस समय घरवालों ने दुल्हे को छिपा लिया। जब मैं अपनी टीम के साथ दुल्हा की तलाश में जुट गई तो गांव के लोगों ने पत्थर फेंके। वहीं मालथौन क्षेत्र में बालविवाह रोकने पर गांव के दबंगों ने बंदूकें निकाल ली थी, लेकिन मैं डरी नहीं। ज्योति बताती हैं कि कई बार समय पर पुलिस का वाहन उपलब्ध नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति मैं निजी वाहन से पहुंच जाती हूं। आधी रात को पति के साथ जाकर कई बार मैंने शादियां रोकी हैं।

गांव की लड़कयों के पास है मेरा नंबर
पिछले छ: वर्षों से बाल विवाह रोक रही ज्योति को गांव-गांव में लड़कियां जानने लगी हैं। उन्होंने बताया कि मेरा मोबाइल नंबर लड़कियों के पास है। गांव में होने जा रहे बाल विवाह की सूचना लड़कियां देती हैं। कुछ लड़कियों ने खुद टीम बुलाकर शादी रुकवाई। उन्होंने बताया कि पुलिस विभाग में कहीं अटैचमेंट के साथ आराम की नौकरी भी कर सकती थी, लेकिन मैंने स्वयं इस काम को चुना है। बाल विवाह रुकने के बाद मेरे पास जब धन्यवाद देने के लिए उन लड़कियों के फोन आते हैं तो मुझे आत्मसंतुष्टि मिलती है। मेरा यह काम लगातार जारी रहेगा।