11 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

प्रभु से मिलन के लिए निष्कपट होना आवश्यक : रामस्वरूपाचार्य

रामस्वरूपाचार्य ने कहा कि यदि भगवान से मिलन करना हो, तो भक्ति के मार्ग पर चलना होगा। कथा में बुंदेला परिवार सहित बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे।

less than 1 minute read
Google source verification

सागर

image

Rizwan ansari

Apr 06, 2025

sagar

sagar

भोपाल रोड़ स्थित नए बस स्टैंड के सामने शनिवार को कथा के सातवें दिन जगद्गुरु रामस्वरूपाचार्य ने रामचरितमानस के सबसे रसपूर्ण केवट प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रभु से मिलन के लिए सरल और निष्कपट होना आवश्यक है। केवट का भगवान से चरण धुलवाने का आग्रह और उनकी सरलता भक्ति के उच्चतम रूप को दर्शाती है। वनवास के दौरान जब भगवान राम, सीता, और लक्ष्मण सरयू नदी पार कर रहे थे, तब केवट से नाव मांगने के बावजूद केवट ने कुछ नहीं मांगा। केवट ने शर्त रखी कि नाव में चढ़ने से पहले राम भगवान के चरण धोने दें। रामस्वरूपाचार्य ने कहा कि यदि भगवान से मिलन करना हो, तो भक्ति के मार्ग पर चलना होगा। कथा में बुंदेला परिवार सहित बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे।