22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

तप रहा बुंदेलखंड, बूंद-बूंद पानी के लिए वन्य प्राणी भी परेशान

ग्रामीण क्षेत्रों में जलसंकट गहराने से लोगों की रातों की नींद दिन का चैन छिन चुका है।

2 min read
Google source verification
Wildlife in Bundelkhand bothered for water

Wildlife in Bundelkhand bothered for water

रहली. जंगलों में जलस्रोत सूखने के कारण अब वन्य प्राणी शहर व ग्राम की ओर आ रहे हैं। रहली के आसपास कड़ता, रमना, महेन्द्रा, रानगिर एवं नौरादेही अभयारण्य क्षेत्र मेंं घना जंगल है। जहां नदी-नाले सहित अन्य पानी के स्रोत सूख चुके हैं। जिससे पानी की तलाश में जंगली जानवर भटक रहे हैं। जिससे वे शिकारियों के निशाने एवं सड़क हादसों का शिकार हो रहे हैं। बुधवार को बंदरों का एक झुंड लगे हैंडपंप पर पानी की तलाश में आ गए। जिन्हें देखकर कुछ जागरूक लोगों ने हैंडपंप चलाकर बंदरों को पानी पिलाया।

तेज गर्मी से सड़कों पर सन्नाटा
सुबह से तपन व तेज गर्मी होने के कारण लोगों का बुरा हाल है। अन्य दिनों में व्यस्तम मार्ग जिन पर हमेशा लोगों का जमावड़ा लगा रहता था वहां दोपहर में सन्नाटा पसरा रहता है। सुबह 10 बजे से लेकर शाम 5 बजे गर्म हवा के चलने से लोगों लू लगने का खतरा बना हुआ है। उधर, देर रात तक मकानों की तपती छत और दीवारें के कारण आमजन परेशान है। दुकानदारों ने बताया कि तेज गर्मी के कारण खरीदार नहीं आ रहे हैं। सुबह-शाम ही बाजारों में दिखाई दे रहे हैं। जलसंकट के कारण कूलर भी अनुपयोगी साबित हो रहे हैं।

जानिए बुंदेलखंड के बारे में
दरअसल, बुन्देलखंड मध्य भारत का क्षेत्र है, जो मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश में है। इस क्षेत्र मुख्य बोली बुंदेली है। यहां भले ही भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधताएं हों लेकिन यहां एकता और समरसता है। बुंन्देेला शासकों और महाराजा छत्रसाल राजा बुन्देेला का जिक्र यहां के इतिहास में है। इतिहास, संस्कृति और भाषा के तहत बुंदेलखंड बहुत विस्तृत प्रदेश है। जानकारी अनुसार वर्तमान भौतिक शोधों के आधार पर बुंदेलखंड को एक भौतिक क्षेत्र घोषित किया गया है और इसकी सीमाएं उत्तर में यमुना, दक्षिण में विंध्य पलेटों की श्रेणियों, उत्तर-पश्चिम में चंबल और दक्षिण-पूर्व में पन्ना-अजयगढ़ श्रेणियों से घिरा हुआ है। इसे बुंदेलखंड के नाम से जाना जाता है। यहां के रहवासियों के लिए मुख्य समस्या पेयजल की हमेशा से ही रही है। इसीलिए ऐतिहासिक काल में राज-महाराजाओं ने बुंदेलखंड में तालबा और बवडिय़ों का भारी मात्रा में निर्माण करवाया था। आज के दौर में भी गर्मी के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के वन्य प्राणियों के लिए पेयजल की भारी समस्या उत्पन्न होती है। जिन स्थानों पर बांध बने हुए हैं, वहां जरूर थोड़ी राहत लोगों को मिलती है।