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बुंदेलखंड के इस विश्वविद्यालय में घातक बीमारियों की जड़ ढूंढ दवा बना रहीं ‘वूमेन साइंटिस्ट’

नेशनल साइंस डे पर पत्रिका ने शहर की कुछ वूमन साइंटिस्ट से बात की तो उनकी उपलब्धि सामने आई।

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'Woman Scientist' found the root of deadly diseases

'Woman Scientist' found the root of deadly diseases

सागर. शहर के विज्ञान का ज्ञान देश ही नहीं बल्कि सरहद पार भी पहुंचेगा। यहां की वूूमन साइंटिस्ट विभिन्न घातक बीमारियों पर शोध कर उनकी दवा इजाद करने में लगीं हैं। नेशनल साइंस डे पर पत्रिका ने शहर की कुछ वूमन साइंटिस्ट से बात की तो उनकी उपलब्धि सामने आई।
इसलिए मनाया जाता है नेशनल साइंस डे
भारतीय वैज्ञानिक सीवी रमन ने रमन प्रभाव की खोज की थी। २८ फरवरी १९२८ को हुई खोज को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

अस्थमा के लिए नए मॉलिक्यूलस पर काम
मुरादाबाद की रहने वाली एकता वर्मा सागर विवि में फार्मास्यूटिकल केमेस्ट्री ब्रांच में हैं। उन्होंने बताया कि अस्थमा का इलाज अभी पूरी तरह संभव नही है। इसलिए मैं शोध में नए मॉलिक्यूलस बना रही हूं, जो इस बीमारी का पूर्ण इलाज कर सके। पर्यावरण प्रदूषण की वजह से अस्थमा में लगातार इजाफा हो रहा है। इससे रोगी को सांस लेने में तकलीफ होती है, जिससे वह अपने रोज के काम भी नहीं कर पाता है।
अल्जाइमर का इलाज हर्बल दवा से
डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विवि के फार्मेसी विभाग की पूजा जैन अल्जाइमर बीमारी पर शोध कर रही हैं। तीन साल से हर्बल दवा पर काम कर रही पूजा बताती हैं कि उम्र बढऩे के साथ यह बीमारी दिमाग पर असर डालती है। रोगी अपनी याददाश्त खोने लगता है। धीरे-धीरे दिनचर्या के काम भी नहीं कर पाता। मैं अपने शोध में हर्बल औषधि का उपयोग कर ऐसी दवा बनाने का प्रयास कर रही हूं, जो इस बीमारी को खत्म करने के साथ इसके कारणों का भी पता लगाए। पूजा ने बताया रिसर्च के लिए आठ माह बचे हैं। इसके बाद इसका एनिमल टेस्ट कराया जाएगा। शोध प्रो. उमेश पाटिल के निर्देशन में किया जा रहा है। पूजा की टीकमगढ़ में शादी होने के बाद वे अपने रिसर्च कार्य को यहां पूरा कर रही हैं। इससे पहले वे एम फार्मा में लिवर संबंधी बीमारी पर काम कर चुकी हैं।
अधिक दवा बनाती है अंगों को घातक
राष्ट्रीय स्तर पर शहर की अंकिता तिवारी पहचान बना चुकी हैं। उन्होंने पतंजलि हर्बल रिसर्च डिपार्टमेंट हरिद्वार में काम किया है और अब वे बड़ी आंत में होने वाले कैंसर पर शोध कर रही हैं। उनके इस शोध का मुख्य उद्देश्य दवाओं से शरीर पर होने वाले घातक असर को पता लगाना है। तिवारी ने बताया कि ड्रग के ज्यादा इस्तेमाल से वह हमारे अन्य अंगों पर प्रभाव डालती है। इसलिए कम ड्रग के इस्तेमाल से बीमारी को ठीक करना उद्देश्य है। अंकिता ने बताया कि दो वर्ष से प्रो. संजय जैन के निर्देशन में रिसर्च कार्य कर रही हैं।