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क्यों मनाई जाती है झूलेलाल जयंती, कैसे सिंधी समाज के इष्ट देव बने जल देवता, पढ़ें पूरी कहानी

सिंधी समाज ने तीन सैकड़ा बाइकों के साथ निकला झूलेलाल जयंती पर काफिला

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सतना

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Suresh Mishra

Apr 06, 2019

kyo manai jati hai jhulelal jayanti cheti chand festival kya hai

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सतना। सिंधी समाज का मुख्य त्योहार भगवान झूलेलाल का जन्मोत्सव 'चेटीचंड' के रूप में मैहर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इष्टदेव भगवान की जयंती पर मैहर में सिंधी समाज द्वारा विशाल बाइक रैली का आयोजन किया गया। रैली में सिंधी समाज के प्रमुख संगठन, सिंधी पंचायत, समाजसेवी संगठन, महिला मंडल एवं युवा साथियों एवं बच्चों ने बढ-़चढ़ कर हिस्सा लिया। काफिले में तीन सैकड़ा बाइकें शामिल रही। वाहन काफिला शनिवार की सुबह 8 बजे बाबा संतदास दरबार कमला मार्केट से शुरू हुआ।

जो नगर प्रमुख मार्ग घण्टाघर, कटरा बाजार, काली माता चौक, रेलवे स्टेशन रोड, सिंधी कालोनी, रेलवे स्टेशन चौक, न्यू रेलवे कॉलोनी, बोस कालोनी, कटनी रोड, महर्षि विद्या मंदिर रोड, पटेहरा होते हुए सक्सेना कालोनी, हाउसिंग बोर्ड कालोनी, शारदा देवी रोड, झूलेलाल चौक से किला, पुरानी बस्ती, रहीम चौक, रंगलाल चौक, राम मंदिर, शारदा चित्र मंदिर, पावर हाउस चंडी देवी मार्ग, स्टेट बैंक से होकर सिंधी धर्मशाला झूलेलाल मंदिर में समापन हुआ।

Jhulelal Jayanti
cheti chand Festival
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ढोल नगाड़ों से रैली का स्वागत
युवा ब्रिगेडियर टीम ने रैली में ढोल नगाड़ों का आयोजन किया। बोस कालोनी में वरियल दास डावानी, रवि डावानी, पटेहरा में दिलीप लालवानी, सोनू लालवानी, बिहारी लाल लालवानी, कैलाश लालवानी हाउसिंग बोर्ड में उद्धव दास माधवानी के निवास पर आरती अरदास पल्लव के साथ भगवान झूलेलाल की पूजा के साथ नाश्ता पानी सर्बत का आयोजन किया गया। जिसमें भक्तो ने अपना मुख पावन किया। रैली में सैकड़ों की तादाद में पुरुष एवं महिलाए शामिल रही है।

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क्या है किवंदतियां
झूलेलाल जयंती से जुड़ी हुई वैसे तो कई किवंदतियां हैं। लेकिन प्रमुख यह है कि सिंधी समुदाय व्यापारिक वर्ग रहा है इसलिए ये व्यापार के लिए जब जलमार्ग से गुजरते थे तो कई विपदाओं का सामना करना पड़ता था। जिसमे समुद्री तूफान, जीव-जंतु, चट्टानें व समुद्री दस्यु गिरोह जो लूटपाट मचा कर व्यापारियों का सारा माल लूट लेते थे। इसलिए इनके यात्रा के लिए जाते समय ही महिलाएं वरुण देवता की स्तुति करती थीं व तरह-तरह की मन्नते मांगती थीं। चूंकि भगवान झूलेलाल जल के देवता हैं। यह सिंधी लोग के आराध्य देव मानें जाते हैं। जब पुरुष वर्ग सकुशल घर लौट आता था तब चेटीचंड को उत्सव के रूप में मनाया जाता था। मन्नतें मांगी जाती थी और भंडारा किया जाता था।