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रामनगर स्कूल रिपेयरिंग घोटाला: 8 और प्राचार्य निलंबित, निलंबन का कुल आंकड़ा 16 तक पहुंचा

पत्रिका के खुलासे के बाद अब तक इस मामले में निलंबित होने वाले प्राचार्यों की संख्या 16 पहुंच गई है। साथ ही बीईओ रामनगर भी निलंबित किए जा चुके हैं।

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सतना। रामनगर स्कूल रिपेयरिंग घोटाले में दोषी पाए गए 8 और प्राचार्य शनिवार को निलंबित कर दिए गए हैं। इनमें से 7 प्राचार्यों को संभागायुक्त बीएस जामोद ने तथा एक प्राचार्य को जिपं सीईओ शैलेन्द्र सिंह ने निलंबित कर दिया है। पत्रिका में हुए इस खुलासे के बाद अब तक इस मामले में निलंबित होने वाले प्राचार्यों की संख्या 16 पहुंच गई है। साथ ही बीईओ रामनगर भी निलंबित किए जा चुके हैं। इस कार्यवाही के बाद अब माना जा रहा है कि जल्द ही दोषी प्राचार्यों सहित ठेकेदारों पर प्रशासन की ओर से एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। इस घोटाले में स्कूलों में बिना निर्माण कार्य करवाए ही पूरी राशि का भुगतान कर दिया गया है।

संभागायुक्त बीएस जामोद ने शनिवार को जिन प्राचार्यों को निलंबित किया है उनमें उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गुलवार गुजारा के प्राचार्य शिवलाल वैस, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हर्रई के प्राचार्य सियंवर सिंह, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय देवदहा के प्राचार्य लक्ष्मण प्रसाद शुक्ला, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कंदवारी के प्राचार्य श्रवण सिंह, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय देवराजनगर के प्राचार्य रामलखन रावत, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गोरसरी के प्राचार्य गुलजार सिंह टेकाम और हाईस्कल गोविंदपुर के प्राचार्य मथुरा प्रसाद शामिल है। जिला पंचायत सीईओ शैलेन्द्र सिंह ने हाईस्कूल देवरा मोलहाई की प्राचार्य रजनी पुरवार को निलंबित किया है।

इतने के गबन में शामिल रहे

जिन प्राचार्यों को निलंबित किया गया है ये सभी प्राचार्य अपने विद्यालयों में स्वीकृत कार्यों के विरुद्ध बिना कार्य करवाए ही ठेकेदारों को पूरी राशि का भुगतान करने बिल सत्यापित करते हुए राशि स्वीकृति आदेश जारी कर दिए। गुलवार गुजारा प्राचार्य शिवलाल वैस ने 23,99,506 रुपए, हर्रई प्राचार्य सियंवर सिंह ने 22,29,506 रुपए, देवदहा प्राचार्य लक्ष्मण प्रसाद शुक्ला ने 24,94,941 रुपए, कंदवारी प्राचार्य श्रवण सिंह ने 23,59,991 रुपए, देवराजनगर प्राचार्य रामलखन रावत ने 24,10,376 रुपए, गोरसरी प्राचार्य गुलजार सिंह टेकाम ने 24,94,490 रुपए, गोविंदपुर प्राचार्य मथुरा प्रसाद वर्मा ने 23,39,615 रुपए और देवरा मोलहाई के प्राचार्य रजनी पुरवार ने 22,19,349 रुपए का भुगतान बिना काम कराए ही कर दिया।

इसके पाए गए दोषी

कलेक्टर मैहर ने घोटाला सामने आने के बाद एसडीएम रामनगर से मामले की जांच करवाई। जिसमें ये सभी प्राचार्य कार्य कराए बिना ठेकेदार द्वारा प्रस्तुत कूटरचित एवं फर्जी बिल को सत्यापित कर सुनियोजित तरीके से शासन की राशि का नियम विरुद्ध तरीके से भुगतान कराने का दोषी पाया गया है। जिसे शासकीय राशि के गबन की श्रेणी में माना गया है।

छोट मछलियां तो निपटी, मगरमच्छ अभी भी बाकी

इस घोटाले का पूरा खेल संचालनालय से होना माना जा रहा है। संचालनालय में पदस्थ संयुक्त संचालक वित्त राजेश मौर्य को इस घोटाले का मास्टर माइंड माना जा रहा है। क्योंकि इन्होंने बीईओ द्वारा भेजे गए गांग पत्र के विरुद्ध अपने से मनमाने कार्य स्वीकृत किए। इतना ही नहीं दो विद्यालय तो ऐसे रहे जहां की कोई मांग भी नहीं भेजी गई वहां भी राशि जारी कर दी गई। जिस तरीख को यह राशि स्वीकृत की गई उसके तीसरे दिन भोपाल से ठेका कंपनी रामनगर पहुंच गई और इस घोटाले को अंजाम देने अपना खेल शुरू कर दिया। पत्रिका में यह मामला उजागर होने के बाद संचालक लोक शिक्षण ने डीईओ से प्रतिवेदन मांगा। जिसमें पूरी कहानी बताते हुए उच्च स्तरीय जांच का प्रस्ताव आयुक्त लोक शिक्षण को दिया गया। 28 जनवरी को भेजे गए इस प्रतिवेदन के बाद भी आयुक्त लोक शिक्षण इस मामले में चुप्पी साधे बैठी हैं और अभी तक कोई जांच संस्थित नहीं की गई है।

संचालनालय के अधिकारी जवाब देने से बच रहे

इस मामले में पत्रिका ने संचालनालय के अधिकारियों का पक्ष जानने संपर्क किया लेकिन वे इससे बचते नजर आए। संचालक केके द्विवेदी ने अपना कार्यक्षेत्र नहीं होना बताते हुए कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। आयुक्त लोक शिक्षण ने इस मामले में फोन उठाने से ही परहेज किया। जबकि उन्हें मैसेज भी किए गए। सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल ने इस मामले में आयुक्त लोक शिक्षण से चर्चा करने कहा। जब उन्हें बताया गया कि वे फोन नहीं उठा रही है तो उन्होंने कहा कि वे इस मामले की जानकारी आयुक्त लोक शिक्षण को दे देंगे।