
Satna airstrip प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)
MP News: जिले में हवाई पट्टी की लंबाई बढ़ाने के नाम पर बीते दिन एसडीएम सिटी ने 12.31 एकड़ जमीन वापस शासकीय करते हुए एयरपोर्ट अथॉरिटी के नाम कर दी। इसके बाद अब बड़ी चुनौती शेष बची 517.05 एकड़ जमीन को शासकीय करने की है। संकेत है कि इस दिशा में भी जल्द कार्यवाही प्रारंभ की जाएगी। लेकिन राजस्व विभाग ने जिस हवाई पट्टी की लंबाई बढ़ाने के लिए यह जमीनें शासकीय की है, इन जमीनों का अवैध कब्जा हटाने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ने अभी तक अतिक्रमण अधिकारी नियुक्त नहीं किया है।
जबकि इस संबंध में एसडीएम सिटी ने 4 नवंबर 2025 को एयर पोर्ट डायरेक्टर सतना और भोपाल के पत्र लिख चुके हैं। एयर पोर्ट अथारिटी के पास कथित तौर पर फर्जी जमीन वापसी के आदेश के बाद 451.63 एकड़ जमीन मौजूद थी। लेकिन इस जमीन पर भी बड़े पैमाने पर अवैध कब्जा हो चुका है।
अवैध कब्जे के सबसे आखिरी सर्वे के अनुसार हवाई अड्डे की जमीन पर 2388 लोगों द्वारा अवैध कब्जा किया गया है। यह कब्जा कच्चे पक्के मकान, झोपड़ी, तार बाड़ी द्वारा किया गया है। चूंकि एयर पोर्ट की जमीन पर हुए अवैध कब्जे को हटाने के अधिकार एयर पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के ही पास है। इसके लिए एयर पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया अधिनियम 1994 की धारा 28 बी के तहत अतिक्रमण अधिकारी नियुक्त करना होता है। लेकिन अथॉरिटी ने नियुक्ति नहीं की है। जिससे हवाई अड्डा विस्तार का कार्य प्रभावित हो रहा है।
सतना एयर पोर्ट विस्तार प्रक्रिया के दौरान हवाई पट्टी छोटी होकर 1200 मीटर हो गई है। जिससे यहां पर मझोले विमान तक नहीं उतर पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में तय किया गया कि हवाई पट्टी की लंबाई 1800 मीटर करने के लिए 12 एकड़ जमीन की और आवश्यकता होगी। लिहाजा इस दायरे में आने वाली 12 एकड़ जमीन को प्रथम चरण में शासकीय किया गया। लेकिन अभी तक अतिक्रमण अधिकारी नियुक्त नहीं होने से यह कवायद अभी बेमानी साबित होगी।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद जिला प्रशासन अब हवाई पट्टी की लंबाई बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। इस मामले को लेकर कलेक्टर सतीश कुमार एस ने सतना एयर पोर्ट डायरेक्टर अशोक गुप्ता और भोपाल एयर पोर्ट डायरेक्टर रामजी अवस्थी के साथ चर्चा की। रामजी अवस्थी ने हवाई पट्टी विस्तार को लेकर पहले अतिक्रमण की पेंच फंसाई। जब उन्हें बताया गया कि यह जिम्मेदारी तो आपकी ही है। जिला प्रशासन सहयोग करेगा। इसके बाद अवस्थी ने दूसरी पेंच फंसाई और कहा कि विस्तार के लिए 100 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी।
इस दौरान उन्हें कहा गया कि आपने जो प्लान दिया था उसमें जितनी जमीन आवश्यक थी उतनी शासकीय कर दी गई है। इस पर अवस्थी अपने प्लान की बात करने लगे। अब तय किया गया है कि हवाई अड्डे के नाम की उनके कब्जे की जमीन, हवाई अड्डे के नाम की लेकिन अवैध कब्जे वाली जमीन और हवाई अड्डे की वह जमीन जो निजी स्वामित्व में है इसकी पूरी जानकारी एयर पोर्ट डायरेक्टर को दी जाएगी। इसके आधार पर वे अपना फाइनल प्लान बना कर देंगे। इसके आधार पर आगे की कार्यवाही जिला प्रशासन करेगा।
Published on:
05 Feb 2026 05:52 pm
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