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3 नवंबर को रिलीज होगी पाटीदार आंदोलन पर बनी फिल्म, MP के ज्ञानेश्वर ने लिखी कहानी

गुजरात चुनाव से पहले महत्वपूर्ण होगी ये फिल्म, बड़े पर्दे पर सीधी का हुनर, ज्ञानेश्वर ने लिखी फिल्म पटकथा

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सतना

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Suresh Mishra

Nov 01, 2017

Patidar anamat andolan movie and movie trailer 2017 songs actor actress on mp sthapna diwas

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सीधी। मध्यप्रदेश के सीधी जिले के युवा लेखक ज्ञानेश्वर सोंधिया की लिखी पठकथा जल्द ही बड़े पर्दे पर नजर आने वाली है। गुजरात के पाटीदार आंदोलन को केन्द्र में रखकर उनके द्वारा लिखी गई बॉलीवुड फिल्म (हमें हक चाहिए, हक से) ३ नवंबर रिलीज होने वाली है। जो देशभर के सिनेमाघरों में एक साथ प्रदर्शित होगी।

इसमें पाटीदार आंदोलन के कई सीन फिल्माए गए हैं। फिल्म की कहानी एक समुदाय के युवा से शुरू होती है, जो प्रतिभावान होने के बावजूद भी बेरोजगारी की मार झेल रहा है।

फिल्म का निर्देशन राकेश जग्गी ने किया

एकता फिल्म इंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्देशन राकेश जग्गी ने किया है। फिल्म की पटकथा और संवाद राहुल शुक्ल ने लिखा है। कहानी लेखक ज्ञानेश्वर सोंधिया मूलत: सिहावल ब्लॉक के कोदौरा गांव के निवसी हैं। 47 वर्षीय ज्ञानेश्वर 16 वर्ष पहले मुंबई घूमने के लिए गए थे, लेकिन वहां आवोहबा उनके जेहन में बस गई।

40 कहानियों का रजिस्ट्रेशन

फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब तक वे सेंसर बोर्ड में 40 कहानियों का रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। डायरेक्टर राकेश जग्गी को उनकी पहली पटकथा 'हमे हक चाहिए हक चाहिए हक सेÓ ही पसंद आ गई। फिल्म की लोकेशन बड़ोदरा गुजरात की है। सूटिंग गुजरात, महाराष्ट्र व हिमांचल प्रदेश के कुछ शहरों में की गई है।

फिल्म ये कलाकार
अजय आर्या ने छायांकन से फिल्म को सजाया है। संजय जायसवाल एडिटिंग और संजय पाठक ने संगीत दिया है। फिल्म के निर्माता हिम्मत लाडूमोर, दीपक डोंगा और रितुल गजेरा हंै। फिल्म को राजेश रुदानी और हिम्मत डोंगा ने प्रेजेंट किया है। धारावाहिक महाराणा प्रताप फेम अंकित भारद्वाज, प्राची बंसल, कुलभूषण खरबंदा, निशि गंधावाड़, मुकुल देव, शशि शर्मा, शिवानी वर्मा, ग्रीवा कंसारा, सुप्रिया कार्णिक, राजीव वर्मा, गौरव और सुदेश बेरी मुख्य भूमिका में हैं।

घूमने गए थे मुंबई, बन गए लेखक
ज्ञानेश्वर ने पत्रिका से चर्चा के दौरान बताया कि कुछ अलग करने की तमन्ना दिल में शुरू से ही थी। इसी सिलसिले में 16 वर्ष पहले मुंबई घूमने के लिए गया था। शुरुआत में वहं छोटे-मोटे सीरियल्स की स्क्रिप्ट लिखा करता था, लेकिन इससे उनका खर्च नहीं निकल पाता था। फिर कहानियां लिखना शुरू किया। लेकिन सफलता हाथ नहीं लग पा रही थी।

कई सीरियल्स में भी किया काम
भाभी जी घर पर है, परवरिश आदि सीरियल्स की भी स्क्रिप्ट वे लिख चुके हैं। वे निर्देशन में भी हाथ अजमा रहे हैं। बताया कि 'डैडी मी नाट किलÓ फिल्म वे खुद बना रहे हैं। इसकी पटकथा भ्रूणहत्या पर आधारित है। फिल्म की लोकेशन भी सीधी है। इसके बाद अगली फिल्म छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर आधारित अबुझमाड़्य होगी।

कहा-पापा से मिली प्रेरणा
ज्ञानेश्वर ने पत्रिका को बताया कि कहानी लिखने का मार्गदर्शन माता-पिता से मिला था। पापा ने कलम पकड़कर लिखना सिखाया। दोनों आज हमारे बीच नहीं हैं। गरीब परिवार में जन्मे लेखक की दो बेटियां हैं। आज भी उनका परिवार गांव में ही रहता है।

गुजरात चुनाव में बदल सकता है माहौल!
राजनीति के जानकारों की मानें तो गुजरात में विधानसभा के प्रथम चरण के चुनाव ९ नवंबर को होने वाले है। इसके पहले मल्टी थ्रियेटर में फिल्म के रिलीज होने से चुनाव के समीकरण बदल सकती है। हालांकि यह दावा नहीं किया जा सकता की आरक्षण मुद्दे का ज्यादा असर हो गया। फिर भी इसको नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। क्योंकि चुनाव है कुछ भी परिणाम आ सकते है।