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जिद के आगे हारा पहाड़

बामनवास . कहा जाता है कि इंसान यदि किसी भी काम को पूरा करने की ठान ले तो संसार में कोई भी काम नामुमकिन नही है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है लिवाली निवासी एक ७५ वर्षीय बुजुर्ग ने। दृढ़ निश्चय और कठोर परिश्रम के बल पर बुजुर्ग ने करीब २२ माह मेहनत कर पहाड़ पर १६२० फीट लंबी पाज (रास्ता) तैयार किया है।

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जिद के आगे हारा पहाड़

२२ माह में १६२० फीट लंबी पाज की तैयार
बामनवास . कहा जाता है कि इंसान यदि किसी भी काम को पूरा करने की ठान ले तो संसार में कोई भी काम नामुमकिन नही है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है लिवाली निवासी एक ७५ वर्षीय बुजुर्ग ने। दृढ़ निश्चय और कठोर परिश्रम के बल पर बुजुर्ग ने करीब २२ माह मेहनत कर पहाड़ पर १६२० फीट लंबी पाज (रास्ता) तैयार किया है।


रास्ता बनने से लोगों को अब पहाड़ पर स्थित कंकाली माता के मंदिर एवं आसानंद के देवस्थान पर जाने में सुविधा हुई है। प्रतिदिन करीब चार से पांच घंटे पहले तो बुजुर्ग ने पहाड़ से पत्थर तोड़े। इसके बाद उन पत्थरों को एक-एक कर जमाया। इसके बाद लोगों की आवाजाही के लिए पाज तैयार हो गई। पाज की चौड़ाई ५ फीट है। इस पर एक साथ तीन आदमी आ-जा सकते हैं।


दो भागों में की तैयार पाज


लिवाली निवासी प्रभूलाल सैनी ७५ ने प्रभु कोली के मकान के पास से ११ सितम्बर २००६ को इस पाज को बनाने का कार्य शुरू किया था। कंकाली माता के मंदिर तक ५४० फीट लंबी पाज का निर्माण उन्होंने ७ माह के भीतर तैयार कर दी। इसके बाद कंकाली माता के मंदिर से आगे आसानंद के देवस्थान तक भी पाज बनाने की उनके मन में प्रेरणा जागी। इसके बाद ७ जुलाई २०१७ को फिर से बुजुर्ग ने कंकाली माता के मंदिर से पाज बनाने का कार्य शुरू किया। लगभग पन्द्रह महीने में जाकर १४ सितम्बर २०१८ को १०८० फीट लंबी इस पाज को पूरा कर दिया। बुजुर्ग प्रभूलाल सैनी ने बताया कि वह आसानंद का भक्त है तथा भगवान की प्रेरणा से ही उनके मन में यह पाज बनाने की ललक जगी। इसके लिए वे दिनभर कठोर परिश्रम करते हैं। उन्होंने बताया कि वे प्रतिदिन सुबह सात बजे इस कार्य के लिए पहाड़ पर चले जाते हैं तथा शाम को लौटकर आते हैं। परिजनों के अनुसार उम्र अधिक हो जाने के कारण शाम को उनकी हालत ठीक नहीं रह पाती, लेकिन फिर भी दूसरे दिन सुबह उठकर अपने मिशन पर चले जाते हैं। जीविकोपार्जन के लिए पूरा परिवार है। बुजुर्ग केवल इसी धुन में लगे रहते हैं।


कहीं कोई उठा न ले पैसा


बुजुर्ग के मन में ऐसा भी कुछ नहीं है कि उसकी खबरें मीडिया में आए, लेकिन इस बार उनके मन में पीड़ा रही कि कहीं कोई संस्था उनके द्वारा किए गए परिश्रम को सरकारी काम बताकर पैसा नहीं उठा ले। इसी उद्ेश्य को लेकर उनकी मंशा रही कि उनके द्वारा किया गया काम जगजाहिर हो। ताकि उक्त कार्य का कोई सरकार से पैसा नहीं उठा सके।


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