
जोन दो विचरण करता बाघ टी-2508 (फोटो: पत्रिका)
सवाईमाधोपुर। रणथम्भौर में बाघों की युवा पीढ़ी अब अपने लिए नया इलाका तलाशने में जुट गई है। इसी क्रम में बाघिन टी-93 की संतान बाघ टी-2507 भी रणथम्भौर में अपनी टेरेटरी बनाने की कोशिश कर रहा है। इससे पहले वन विभाग ने इसके भाई बाघ टी-2508 को नॉन टूरिज्म क्षेत्र लाहपुर से कोटा के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व शिफ्ट किया था।
जानकारी के अनुसार मंगलवार को सुबह की पारी में पार्क भ्रमण पर गए पर्यटकों को पहली बार जोन-2 में खेमचा कुंड के पास बाघ टी-2507 के दीदार हुए। इससे पहले सुबह के समय यह बाघ त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर भी पर्यटकों और श्रद्धालुओं को नजर आया था।
रणथम्भौर में वर्तमान में युवा बाघ-बाघिनों की संख्या बढ़ रही है और वे अपने लिए सुरक्षित इलाका तलाश रहे हैं। इसी कारण कई बाघ नॉन टूरिज्म क्षेत्र से निकलकर टूरिज्म जोनों की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में इलाकाई वर्चस्व को लेकर बाघों के बीच संघर्ष की आशंका एक बार फिर बढ़ गई है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार रणथम्भौर के जोन-2 में पहले से ही बाघिन टी-105 (नूरी), बाघ टी-120 (गणेश), बाघिन रिद्धी (टी-124), बाघ टी-101 सहित कई बाघ-बाघिनों का नियमित विचरण है। ऐसे में नए बाघ के लिए इस क्षेत्र में स्थायी रूप से जगह बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
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Updated on:
14 Jan 2026 02:35 pm
Published on:
14 Jan 2026 02:33 pm

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