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इन किलर प्वाइंटों पर जा रही हर माह दस की जान

किलर प्वाइंट हर माह औसतन दस लोगों की जिंदगी लील रहे है, लेकिन अनदेखी के चलते हादसों पर लगाम नहीं लगाई जा रही। आप भी जानिए इन खतरनाक प्वाइंटों को...

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Abhishek Ojha

Dec 29, 2016

जिले में कोहरे व अन्य कारणों से बढ़ रहे सड़क हादसों के बाद भी पुलिस व सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों की नींद नहीं खुली है। हर माह दस लोगों की सड़क हादसे में मौत हो रही है।

इसे देखते हुए जिले में 27 किलर प्वाइंट चिह्नित तो किए गए, लेकिन एक साल बाद भी इनकी स्थिति जस की तस बनी हुई है। ऐसे में दुर्घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा।

पिछले पांच सालों में 602 मौत हो चुकी है। इसमें से ज्यादातर हादसे पुलिस द्वारा चिह्नित किलर प्वाइंट पर हुए हैं। करीब 10 फीसदी हादसे कोहरे के कारण होना बताया जा रहा है। वर्ष दर वर्ष सड़क हादसों में बढ़ोतरी हो रही है।

इसके लिए सड़क पर मोड़ व पुलिया पर निर्माण में रही तकनीकी खामियां जिम्मेदार ठहराई जा रही है। पुलिस ने एक साल पहले ऐसी जगह चिह्नित की थी, जहां हादसे अधिक हो रहे हैं। साथ ही इसकी सूची सानिवि अधिकारियों को भी दी, लेकिन अब तक इनमें कोई सुधार नहीं किया गया है।

जबकि जिला सीएलजी समिति और अधिकारियों की बैठक में भी इनका मुद्दा उठता है।

जिले में यह हैं किलर प्वाइंट

जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 27 किलर प्वाइंट चिह्नित हैं। कोतवाली थाना इलाके में खैरदा रोड से जीनापुर, अनाज मण्डी रोड, रणथम्भौर रोड, मानटाउन थाने में पुलिस लाइन तिराहा, खैरदा रोड, रवांजना डूंगर थाने में रवांजना चौड़ स्टेट हाइवे, पीपलवाड़ा स्टेट हाइवे, चौथकाबरवाड़ा, शिवाड़, मलारना डूंगर में रसूलपुरा, मलारना चौड़ मेगा हाइवे, खिरनी मोड़ भाड़ौती, बौंली थाने में जस्टाना व देवली, गंगापुरसिटी थाने में गंगाजी की कोठी, ओसाल मिल चुंगी नाका, प्राइवेट बस स्टैण्ड, सदर गंगापुरसिटी थाने में जलोखरा, मिर्जापुर, बामनवास थाने में पिपलाई व कोयला, बामनवास, बाटोदा थाने में जीवद व टोल नाका, वजीरपुर थाने में सेवा व वजीरपुर, सूरवाल में पढ़ाना मोड़ किलर प्वाइंट हैं।

ये है बार-बार दुर्घटनाएं होने के कारण

कंज्यूमर लीगल हेल्प सोसायटी अध्यक्ष हरिप्रसाद योगी व पुलिस अधिकारियों के अनुसार सड़क निर्माण में रही खामियों के कारण हादसे अधिक हो रहे हैं।

खैरदा रोड पर पुलिया की बनावट में विपरीत दिशा में मोड़ व चौड़ाई कम होने से, अनाज मण्डी रोड पर दोनों ओर आबादी अधिक होने से वाहनों की अधिक आवाजाही, रणथम्भौर रोड पर दो मोड़ विपरीत दिशा में होने व वाहनों का दबाव अधिक होने, पुलिस लाइन तिराहे पर हो रहे गड्ढे, यातायात नियंत्रित करने के लिए प्वाइंट नहीं होने के साथ सड़क पर गलत जगह पर गति अवरोधक बनाए जाने से हादसे अधिक होते हैं।

यह होने चाहिए सुधार

जिले में सड़क हादसों में कमी लाने के लिए सड़कों में रही तकनीकी खामियों को दूर किया जाना चाहिए। घुमाव व पुलिया पर सड़क मापदण्ड अनुसार बनाई जाए।

इसके अलावा आबादी क्षेत्र में जेब्रा क्रॉसिंग होनी चाहिए। साथ ही गलत तरीके से बने गति अवरोधकों को सही किया जाए। इसके साथ दुपहिया वाहन चालक हेलमेट का इस्तेमाल करें और चौपहिया वाहन चालक सीट बैल्ट लगाकर वाहन चलाएं।

5 साल में 1795 दुर्घटनाएं

जानकारी के अनुसार पिछले पांच साल में हुई 1795 दुर्घटनाओं में 602 लोगों की जान जा चुकी है। हर माह दस जने हादसों की भेंट चढ़ रहे हैं। जबकि इन हादसों में 2176 लोग घायल हो गए।