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पेट्रोल की तरह बढ़ रहे है केरोसिन के दाम

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उपभोक्ताओं पर आर्थिक भार, हर माह पैसे से रुपए तक बढ़ोत्तरी
सवाईमाधोपुर. डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरती साख से सिर्फ पेट्रोल और डीजल के दामों में ही आग नहीं लगी है। गरीब के घर में जलने वाले चूल्हों और दियों को भी इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। पिछले नौ महीने में दस बार केरोसिन के दामों में वृद्धि हुई है। हर महीने 50 पैसे से दो रुपए तक की बढ़ोतरी की गई है। इससे केरोसिन उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।


राज्य सरकार गुपचुप तरीके से पिछले एक साल से लगातार हर माह मिट््टी के तेल की कीमतों में बढ़ोतरी कर रही है और आगे भी बढ़ोतरी करने के ही आदेश विभाग के पास है। गरीबों के घर चूल्हा या दिए जलाने के लिए मिट्टी का तेल का ही उपयोग आज भी होता है। लेकिन सरकार की ओर से जिस तरह से केरोसिन की कीमतों में बढ़ोतरी की जा रही है, उसकी भनक न तो उपभोक्ताओं को लगती है और न ही आम जनता को। इस का फायदा उठाकर विभाग हर माह आदेश जारी कर 50 पैसे से लेकर दो रुपए तक की कीमत प्रति लीटर बढ़ा देता है।


जिला व प्रदेश में मिट्टी के तेल का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या के आधार पर एक महीने में 1 करोड़ 2 लाख 52 हजार रुपए तक की राशि सरकार उपभोक्ताओं से ज्यादा वसूल कर रही है।


हालांकि यह आंकड़ा जुलाई और अगस्त के बीच कीमत बढ़ोतरी के बाद सामने आया है। जानकारी के अनुसार दिसम्बर माह के बाद से तो लगातार कीमतें बढ़ाई गई हैं। दूसरी ओर वर्तमान में केरोसिन का उपयोग प्रदेश में 1 करोड़ 28 लाख 16 हजार 97 लोग कर रहे है। यह रिपोर्ट भी रसद विभाग ने ही जारी की है,जबकि सवाईमाधोपुर में मिट््टी के तेल का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या 2 लाख 67 हजार 563 है। वहीं विभागीय अधिकारियों की माने तो ऐसे सरकार के आदेश है।

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