
500 वर्ष से अधिक पुराना चौथ माता मंदिर। फोटो: पत्रिका
Sawai Madhopur News: चौथकाबरवाड़ा कस्बे के प्रसिद्ध चौथ माता मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए रोपवे निर्माण की मांग वर्षों से उठ रही है, लेकिन करीब डेढ़ दशक से यह परियोजना फाइलों में ही अटकी हुई है। लगभग एक हजार फीट ऊंचाई पर स्थित इस प्राचीन मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 700 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।
यह कठिन चढ़ाई विशेषकर बुजुर्गों, दिव्यांगों और बीमार श्रद्धालुओं के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। 500 वर्ष से अधिक पुराने इस मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। चौथ माता मेले और बड़ी चतुर्थियों के अवसर पर यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती है।
इसके बावजूद यहां रोपवे जैसी सुविधा का अभाव है। कई श्रद्धालु कठिनाई के कारण आधे रास्ते से ही लौटने को मजबूर हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रोपवे परियोजना शुरू होती है तो हर वर्ग के श्रद्धालु आसानी से माता के दर्शन कर सकेंगे।
चौथ का बरवाड़ा सवाईमाधोपुर जिला मुख्यालय से मात्र 22 किलोमीटर दूर है। यहां सड़क और रेल मार्ग से अच्छी कनेक्टिविटी है। साथ ही क्षेत्र में स्थित हेरिटेज होटल और प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटन की संभावनाओं को और बढ़ाते हैं। नागरिकों का मानना है कि रोपवे परियोजना शुरू होने पर श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
श्री चौथ माता ट्रस्ट के मंत्री श्रीदास सिंह ने बताया कि रोपवे प्रोजेक्ट कलक्टर कार्यालय में लंबित है। वहीं क्षेत्रीय वनाधिकारी कैलाश शर्मा का कहना है कि उनके पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं आया है और अधिक जानकारी के लिए पर्यटन विभाग से संपर्क करना चाहिए। इधर, तहसीलदार नीरज सिंह ने बताया कि रोपवे का सर्वे कार्य हो चुका है, लेकिन फिलहाल उनके पास पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
स्थानीय लोगों ने राज्य सरकार से मांग की है कि चौथ माता मंदिर में रोपवे परियोजना को जल्द मंजूरी देकर कार्य शुरू कराया जाए, ताकि श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन के साथ क्षेत्र का समग्र विकास भी सुनिश्चित हो सके।
Published on:
23 Apr 2026 02:33 pm
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