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सिर्फ 6 महीने का था मिशन, अब भी सक्रिय मंगलयान

इसरो ने मंगलयान का प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपने विश्वसीय रॉकेट धु्रवीय प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) से किया था।
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Jameel Ahmed Khan

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Updated: 6 Nov 2017, 6:20 PM IST

Mangalyaan

Mangalyaan

बेंगलूरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चार साल पूर्व देश के पहले अंतरग्रहीय अभियान के तहत लाल ग्रह पर मिशन भेजा था। ५ नवम्बर २०१३ को प्रक्षेपित मंगलयान मिशन की उम्र सिर्फ छह महीने की थी, लेकिन मंगल की कक्षा में मंगलयान अब भी सक्रिय है। इसरो दुनिया की एकमात्र अंतरिक्ष एजेंसी है, जो अपने पहले ही प्रयास में मंगल पर मिशन भेजने में सफल रही है। मंगलयान लालग्रह की कक्षा में ११०० दिन से ज्यादा बिता चुका है।

इसरो ने मंगलयान का प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपने विश्वसीय रॉकेट धु्रवीय प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) से किया था। ५ नवम्बर २०१३ को प्रक्षेपित मंगलयान १ दिसम्बर २०१३ को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकल कर करीब १० महीने की लंबी अंतरिक्ष यात्रा पर रवाना हुआ था। करीब ३०० दिनों की यात्रा कर २४ सितम्बर २०१४ को यह यान मंगल ग्रह की कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश कर गया। तब से मंगल ग्रह की कक्षा में परिक्रमा करते हुए यान ने वैज्ञानिकों को काफी जानकारियां उपलब्ध कराई हैं। मंगलयान ने अभी तक मंगल की ४०० से अधिक परिक्रमाएं की हैं और अहम आंकड़े भेजे हैं जिनका वैज्ञानिक विश्लेषण प्रगति पर है।

सिर्फ ४५० करोड़ का था मिशन

कम बजट, बेहद उपयोगी पांच विविध वैज्ञानिक उपकरणों (पे-लोड) और पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में पहुंचने के कारण मंगलयान विश्व के सफलतम अंतरग्रहीय मिशनों में अपना विशिष्ट स्थान रखता है। यह मिशन सिर्फ ४५०
करोड़ रुपए का था, जो अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के द्वारा उसी दौरान प्रक्षेपित मावेन मिशन के बजट का सिर्फ दसवां हिस्सा भर था। पिछले तीन वर्षों के दौरान भारतीय यान ने मिशन उद्देश्यों को पूरा करने के साथ ही कई अहम अनुसंधान भी किए हैं। मंगल की धरती पर मौजूद सल्फेट और लोहा जैसे धातुओं की पहचान, मंगल ग्रह की अनदेखी तस्वीरों के अलावा धूमकेतु साइडिंग स्प्रिंग के मंगल के करीब से गुजरने की तस्वीरें भेजी। इस दौरान मंगलयान पर ग्रहण कई बाधाएं आई मगर सुरक्षित रहा और अगले कई वर्षों तक मंगल की कक्षा में परिक्रमा करता रहेगा।