
समुद्र के नीचे अभी भी हैं पीने वाले पानी के स्रोत, शोध में हुआ खुलासा
नई दिल्ली। हजारों साल पहले सभी ग्रह ग्लेशियरों से ढंके हुए थे। उत्तर अमरीका (AMRICA) के महाद्वीपों में भी बर्फ (ICE) की भारी चादर जमने के कारण महासागरों (HIND MAHASAGAR) में पानी (WATER) की कमी होती चली गई , लेकिन जब हिमयुग समाप्त हुआ तो यही ग्लेशियर पिघल गए और विशाल नदी डेल्टा महाद्वीपीय (ocean)शेल्फ के बाहर बहने लगी।
यही नहीं समुद्र की उठती लहरों के नीचे तलछट में फंस गई। 1970 के दशक में तेल की खदानों को खोजने के लिए ड्रिलिंग की गई तो वैज्ञानिकों को वहां पीने वाले ताजे पानी के नए स्रोत मिले। जर्नल साइंटिफिक पत्रिका में छपी रिपोर्ट के मुताबिक- कोलंबिया यूनिवर्सिटी और 'वुड्स होल' ओशनोग्राफिक इंस्टीट्यूशन के वैज्ञानिकों ने इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सेंसर्स की मदद से न्यू जर्सी से मैसाचुसेट्स की रिसर्च के लिए शिप पर 10 दिन बिताए।
जिसमें विद्युत चुम्बकीय तरंगों के जरिए ताजे और खारे पानी को मापा गया। शोधकर्ताओं ने समुद्र की गहराई को मापने के लिए ताजे पानी के जलाशयों की मैपिंग की।
बता दें कि यह जगह अमरीकी अटलांटिक तट से कम से कम 50 मील की दूरी से निकालती है, जिसमें से कम-लवणता वाले भूजल के विशाल भंडार हैं। यह ओंटारियो झील के लगभग दोगुने हिस्से फैला हुआ है। यह स्रोत समुद्र तल से लगभग 600 फीट (183 मीटर) नीचे शुरू होते हैं और सैकड़ों मील तक फैले हैं।
शोध के प्रमुख लेखक क्लो गुस्टाफसन के अनुसार- "हमें पता था कि वहां अलग-थलग जगहों पर ताजा पानी था, लेकिन तब हम सीमा या ज्यामिति को नहीं जानते थे।’
कोलंबिया विश्वविद्यालय के लामोंट-डोहर्टी अर्थ ऑब्जर्वेटरी में पीएचडी कर रहे स्टूडेंट्स का मानना है कि "यह दुनिया के अन्य हिस्सों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन बन सकता है।"
समुद्र के पाया जाने वाला पानी शुद्ध और ताजा नहीं है, लेकिन कुछ ऐसे हिस्से हैं जिसमें कम नमक सांद्रता पाई जाती है। समुद्र के किनारों के पास कई ऐसी जगहें हैं, जहां पीने वाली पानी के स्रोत हैं।
Published on:
24 Jun 2019 10:21 am
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