
46 सालों से क्यों चांद पर नहीं पहुंच पाया कोई यात्री, हैरान कर देने वाली सच्चाई आई सामने
नई दिल्ली। चांद का सफर जितना रोमांचकारी है उतना ही कठिन भी। यूं तो हर कोई चांद पर जाना चाहता है लेकिन अभी यह इतना आसान नहीं है। यही कारण है कि आज भी इतिहास के पन्ने में 21 जुलाई 1969 की तारीख दर्ज है जब नील आर्मस्ट्रांग ने पहले अंतरिक्ष यात्री के रूप में चांद पर कदम रखा था और साल 1972 में चांद पर पहुंचने वाले आखिरी अंतरिक्ष यात्री यूजीन सेरनन बने थे। लेकिन उसके बाद से चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद कोई इंसान फिर से चांद पर क्यों नहीं पहुंच पाया इसका एक बहुत बड़ा कारण है।
बता दें कि साल 2004 में भी अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने चांद पर इंसानी मिशन भेजने का प्रस्ताव पेश किया था। इसके लिए 1,04,000 मिलियन डॉलर का अनुमानित बजट भी बनाया गया था, लेकिन बाद में वो प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया। हालांकि अमेरिका ने साल साल 2017 में फिर से ये एलान किया था कि वो फिर से चांद पर इंसानों को भेजेगा और खास बात यह है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इससे जुड़े एक आदेश पर हस्ताक्षर भी कर दिए हैं।
सबसे अच्छी बात यह है कि भारत भी अब इस काम में पीछे नहीं है और 15 अगस्त 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानव मिशन 2022 की घोषणा कर चुके हैं। इस परियोजना को अमलीजामा पहनाते हुए साल के आखिर में 28 दिसंबर को भारत के महत्वाकांक्षी मानव मिशन के क्रियान्वयन की दिशा में केंद्र सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये के गगनयान मिशन को मंजूरी दी। इस कार्यक्रम के तहत अंतरिक्ष में दो मानवरहित यानों के साथ-साथ एक यान ऐसा भेजे जाने की परिकल्पना है, जिसमें अंतरिक्ष यात्री भी होंगे। गौर करने वाली बता यह है कि अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ने ही इंसानों को अंतरिक्ष में भेजा है।
दरअसल, चांद पर किसी इंसान को भेजना काफी महंगा होता है, जबकि इससे कोई ज्यादा खास फायदा नहीं होता है। ऐसे में कोशिश होती है कि अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर जरूरत पड़ने पर ही भेजा जाए। इस बारे में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में खगोल विज्ञान के प्रोफेसर माइकल रिच का कहना है, 'चांद पर इंसानी मिशन भेजने में काफी खर्च आया था, जबकि इसका वैज्ञानिक फायदा कम ही हुआ।' यही कारण है कि अधिकांश देश चांद पर इंसानों को भेजने से कतराते हैं।
Published on:
02 Jan 2019 01:02 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
