ट्रंप ने नवम्बर २०२० में एक आदेश जारी किया था, जिसके अनुसार चीनी सेना से जुड़ी कम्पनियों में अमरीकी निवेश पर प्रतिबंध लगाया गया था। मकसद चीन की कथित गलत व्यापार नीतियों के लिए उस पर दबाव बनाना था। ट्रंप सरकार ने जाते-जाते यह आदेश जारी किया था। इनमें बाइटडांस लिमिटेड, टिकटॉक और वीचैट की मालिकाना हक वाली कम्पनी टैन्सेंट होल्डिंग्स लिमिटेड भी शामिल हैं। हुवावै टैक्नोलॉजी पर सबसे बुरा असर पड़ा है। कम्पनी पर अमरीका से कलपुर्जे खरीदने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, जिसके चलते उसे विश्व भर में अपने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बंद करने पड़े। शाओमी पर से भले ही प्रतिबंध हटा दिए गए हों, पर ऐसे संकेत हैं कि बाइडन सरकार भी चीन पर दबाव बनाए रखना चाहती है। इसी सप्ताह बाइडन सरकार ने 2019 का एक आदेश पुन: लागू किया है, जिसमें अमरीकी कम्पनियों पर प्रतिबंध लगाया गया है कि वे हुवावै जैसी कम्पनियों द्वारा निर्मित उपकरणों का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है। इस बीच, अमरीकी संसद ऐसे द्विदलीय कानून की लगातार बढ़ती जरूरत पर जोर दे रही है जिससे तकनीक और अत्यधिक महत्व के निर्माण क्षेत्र में न केवल अमरीकी की प्रतिद्वंद्विता में सुधार लाया जा सके, बल्कि चीन का डटकर मुकाबला भी किया जा सके।