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40 हजार हेक्टेयर कम हुआ जंगल का रकबा

वन विभाग ने कराया सीमाकंन। सागौन की तस्करी और खेत बनाने जिले में काटे जा रहे जंगल

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Bharat pandey

Jan 05, 2017

sehore forest area

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सीहोर। जिले के जंगलों पर बेरहमी से कुल्हाड़ी चलाई जा रही है। सागौन की तस्करी और जंगल को खेत बनाने के लिए जिले के हर हिस्सें में बेतहाशा कटाई की जा रही है। यहीं कारण है कि जिले में जंगलों का रकबा तेजी से घटा है। वन विभाग के अधिकारियों की माने तो ताजा सीमांकन में वन रकबे में गिरावट दर्ज की गई है।

जिले के जंगल का रकवा पिछले दो साल में 40 हजार हेक्टेयर तक कम हुआ है। जिले के जंगलों का सीमांकन 14 साल पहले साल 2001-02 में वन विभाग द्वारा वृहत पैमाने पर करवाया था। इस दौरान जंगलों की सीमाबंदी के साथ ही चिंहाकन भी किया गया था। इस सीमांकन में जिले का कुल वन रकबा 6 लाख 7 हजार 433 हेक्टेयर था, जो कि अब घटकर 5 लाख 70 हजार हेक्टेयर रह गया है।
चोरी की बाइक से होती है सागौन की तस्करी
पिछले सप्ताह आष्टा में पुलिस ने बाइक चोर गिरोह से 65 बाइक जब्त की थी। पूछताछ में चोरों ने बताया कि वह चोरी की बाइक सागौन तस्करों को पांच हजार रुपए में बेचते हैं। सागौन की तस्करी में चोरी की बाइक का उपयोग इस उद्देश्य से किया जाता है कि पकड़े जाने पर तस्कर बाइक छोड़कर आसानी से भाग सकें।

जिले 80 फीसदी वन क्षेत्र में सागौन
जिले के जंगलों पर हमेशा लकडी तस्करों की नजरें टिकी रहती है। वन्यग्रामों में तो जंगल कटाई लघु उद्योग का रूप ले चुकी है। जिले के जंगलों का 80 फीसदी भाग सागौन के पेड़ों से ढंका है। सागौन की लकड़ी मुहं मांगे दामों पर बेची जाती है। इस लकड़ी की जोरदार मांग के चलते सागौन कटाई और तस्करी में संगठित रूप से गिरोह काम करते है। हर रोज जिले के इछावर, बुदनी, रेहटी और आष्टा रेंज से हजारों घन मीटर सागौन लकड़ी आसपास के जिलों में सप्लाई की जाती है।

जले में वन रकबा कम नहीं हुआ है, लेकिन वन भूमि का उपयोग बदल गया है। जिले में बीते तीन सालमें साढ़े तीन हजार लोगों को वनभूमि के पट्टे दिए गए है। निजी भूमि पर स्थित जंगल को साफ कर लोगों ने खेती करना प्रारंभ कर दिया गया है। मवेशियों की संख्या बढऩे का असर भी वन रकबे पर पड़ा है।
यूएन सिंह, एसडीओ वन विभाग सीहोर

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