
ये हैं वे भोग, जो करते हैं भगवान को प्रसन्न
भोपाल। पुराने या यूं कहें प्राचीन काल से ही हिंदू रीति-रिवाजों में भगवान को भोग लगाने की चली आ रही परंपरा आज भी कायम है। थोड़ा-सा प्रसाद हो, भंडारा हो या लंगर, कोई भी पूजा भोग के बिना संभव नहीं है।
पत्रं, पुष्पं, फलं, तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मन:।'
अर्थ : जो कोई भक्त मेरे लिए प्रेम से पत्र, पुष्प, फल, जल आदि अर्पण करता है, उस शुद्ध बुद्धि निष्काम प्रेमी का प्रेमपूर्वक अर्पण किया हुआ वह पत्र-पुष्पादि मैं सगुण रूप में प्रकट होकर प्रीति सहित खाता हूं। - श्रीकृष्ण
दरअसल पूजा-पाठ या आरती के बाद तुलसीकृत जलामृत व पंचामृत के बाद बांटे जाने वाले पदार्थ को 'प्रसाद' कहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर भगवान को एक जैसा प्रसाद नहीं चढ़ाया जाता। इसी कारण अक्सर भगवान के भोग में वह चीज रखी जाती है जो उन्हें सबसे ज्यादा प्रिय हैं।
इस संबंध में पंडित सुनील शर्मा का कहना है कि दरअसल भगवान के भोग के पीछे का भी एक रहस्य है, जिसकी जानकारी के अभाव में लोग कई बार कुछ ऐसा प्रसाद भगवान को चढ़ा देते हैं, जो उनका मनपसंद भोग नहीं होता, जिस कारण व्यक्ति को पूर्ण सफलता में कुछ कमी रह जाती है...
नैवेद्य : ये होता है ...
भोजन करते वक्त उसका कुछ हिस्सा प्राचीनकाल से ही प्रत्येक-हिन्दू देवी-देवताओं को समर्पित करते आया है। यज्ञ के अलावा वह घर-परिवार में भोजन का एक हिस्सा अग्नि को समर्पित करता था। अग्नि उस हिस्से को देवताओं तक पहुंचा देती थी। चढा़ए जाने के उपरांत नैवेद्य द्रव्य 'निर्माल्य' कहलाता है।
कौन सा है विष्णु भोग :
भगवान विष्णु को खीर या सूजी के हलवे का नैवेद्य बहुत पसंद है। खीर कई प्रकार से बनाई जाती है। खीर में किशमिश, बारीक कतरे हुए बादाम, नारियल की कतरन, काजू, पिस्ता, चारौली के साथ तुलसी का पत्ता भी डाला जाता है। तभी यह विष्णु भोग का रूप लेता है। कई तरह के हलवे बनते हैं लेकिन सूजी का हलवा विष्णुजी को बहुत प्रिय है। हर रविवार और गुरुवार को विष्णु-लक्ष्मी मंदिर में यह भोग लगाया जाए तो माना जाता है कि मन की हर मनोकामना पूरी होती है।
ये है भगवान शंकर का शिव भोग :
देवों के देव महादेव यानि शिव को भांग और पंचामृत का नैवेद्य पसंद है। भोले को दूध, दही, शहद, शकर, घी, जलधारा से स्नान कराकर भांग-धतूरा, गंध, चंदन, फूल, रोली, वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। शिवजी को रेवड़ी, चिरौंजी और मिश्री भी अर्पित की जाती है। श्रावण मास में शिवजी का उपवास रखकर उनको गुड़, चना और चिरौंजी के अलावा दूध अर्पित करने से सभी तरह की मनोकामना पूर्ण होती है।
जानें हनुमान भोग में क्या आता है :
रुद्रावतार व श्रीराम भक्त हनुमानजी को हलुआ, पंच मेवा, गुड़ से बने लड्डू या रोठ, डंठल वाला पान और केसर- भात बहुत पसंद हैं। इसके अलावा हनुमानजी को कुछ लोग इमरती भी अर्पित करते हैं। कोई व्यक्ति 5 मंगलवार कर हनुमानजी को चोला चढ़ाकर यह नैवेद्य लगाता है, तो उसके हर तरह के संकटों का अविलंब समाधान होता है।
लक्ष्मी भोग: ये हैं धन संपत्ति की देवी मां का भोग...
धन संपत्ति की देवी मां लक्ष्मीजी को सफेद और पीले रंग के मिष्ठान्न, केसर-भात बहुत पसंद हैं। कम से कम 11 शुक्रवार को जो कोई भी व्यक्ति एक लाल फूल अर्पित कर लक्ष्मीजी के मंदिर में उन्हें यह भोग लगाता है तो उसके घर में हर तरह की शांति और समृद्धि रहती है। किसी भी प्रकार से धन की कमी नहीं रहती।
दुर्गा भोग: शक्ति की देवी का भोग ऐसे जानें...
शक्ति की देवी दुर्गाजी को खीर, मालपुए, मीठा हलुआ, पूरणपोरी, केले, नारियल और मिष्ठान्न बहुत पसंद हैं। नवरात्रि के मौके पर उन्हें प्रतिदिन इसका भोग लगाने से हर तरह की मनोकामना पूर्ण होती है, खासकर माताजी को सभी तरह का हलुआ बहुत पसंद है।
सरस्वती भोग : विद्या की देवी का ये है भोग...
विद्या की देवी माता सरस्वती को दूध, पंचामृत, दही, मक्खन, सफेद तिल के लड्डू तथा धान का लावा पसंद है। सरस्वतीजी को यह किसी मंदिर में जाकर अर्पित करना चाहिए, तो ही ज्ञान और योग्यता का विकास होगा।
गणेश भोग: प्रथम पूज्य देव की ये है पसंद...
प्रथम पूज्य देव गणेशजी को मोदक या लड्डू का नैवेद्य अच्छा लगता है। मोदक भी कई तरह के बनते हैं। मोदक के अलावा गणेशजी को मोतीचूर के लड्डू भी पसंद हैं। शुद्ध घी से बने बेसन के लड्डू भी पसंद हैं।
इसके अलावा आप उन्हें बूंदी के लड्डू भी अर्पित कर सकते हैं। नारियल, तिल और सूजी के लड्डू भी उनको अर्पित किए जाते हैं।
राम भोग : मर्यादा पुरुषोत्तम का पसंदीदा भोग...
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामजी को केसर भात, खीर, धनिए का भोग आदि पसंद हैं। इसके अलावा उनको कलाकंद, बर्फी, गुलाब जामुन का भोग भी प्रिय है।
श्रीकृष्ण भोग : लीला पुरुषोत्तम को ये है पसंद...
लीला पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण को माखन और मिश्री का नैवेद्य बहुत पसंद है। इसके अलावा खीर, हलुआ, पूरनपोळी, लड्डू और सिवइयां भी उनको पसंद हैं।
कालिका और भैरव भोग : ऐसे समझें...
इसके अलावा माता कालिका और भगवान भैरवनाथ को लगभग एक जैसा ही भोग लगता है। हलुआ, पूरी और मदिरा उनके प्रिय भोग हैं। किसी अमावस्या के दिन काली या भैरव मंदिर में जाकर उनकी प्रिय वस्तुएं अर्पित करें। इसके अलावा इमरती, जलेबी और 5 तरह की मिठाइयां भी अर्पित की जाती हैं।
Updated on:
21 Dec 2019 02:26 pm
Published on:
21 Dec 2019 01:51 pm
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