
MP's formula will increase pulse production in the country by 8 million tons
MP Farmers- दालें प्रोटीन का सबसे बड़ा स्रोत हैं। यही कारण है कि देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने पर खासा जोर दिया जा रहा है। सीहोर के अमलाहा में राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के लिए राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन आयोजित किया गया। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराजसिंह चौहान व सीएम मोहन यादव ने सम्मेलन का शुभारंभ किया। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव संजीव कुमार अग्रवाल ने बताया कि राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के लिए भारत सरकार ने 11 हजार 440 करोड़ रुपए निर्धारित किए हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट ने दलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एमपी का फार्मूला देश में दालों का उत्पादन 8 मिलियन टन तक बढ़ा देगा।
सम्मेलन में बताया कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय दलहन फसलों के प्रोत्साहन के लिए मिशन मोड में काम कर रहा है। दलहन मिशन के अंतर्गत केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम कर रही हैं। किसानों को उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसानों को नई तकनीक और मशीनों के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
दलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश के योगदान का खासतौर पर जिक्र किया गया। बताया गया कि एमपी, दलहन उत्पादन में देश में अग्रणी राज्य है। सीहोर में इकार्डा ने कई फसलों के बीजों पर काम किया है। मध्यप्रदेश की धरती पर विकसित हुई तकनीक और बीज देशभर में पहुंचाने की भी बात कही गई।
अंतर्राष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (इकार्डा) के महानिदेशक अली अबुर साबा ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने इकार्डा को पल्सेस प्रोडक्शन डेवलम्पमेंट कंसल्टेशन के लिए चुना है। भारत वैश्विक स्तर पर दालों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। यहां दालें प्रोटीन का मुख्य स्त्रोत हैं। इकार्डा ने अपने शोध केंद्रों में 41 सभी प्रकार की दालों की नई किस्में तैयार की हैं।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराजसिंह चौहान, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और इकार्डा के सहयोग से दालों के अनुसंधान के लिए सीहोर में केंद्र शुरु किया गया है। उन्होंने कहा कि देश में दालों की औसत उत्पादकता 926 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर है जबकि मध्यप्रदेश में यह आंकड़ा 1200 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर है। महानिदेशक डॉ. एमएल जाट के मुताबिक अगर मध्यप्रदेश से फार्मूला सीखकर हम इसे देश में लागू करेंगे तो भारत में दालों का उत्पादन 8 मिलियन टन तक बढ़ सकता है। इससे देश दलहन उत्पादन के मामलों में आत्मनिर्भरता प्राप्त कर लेगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद भी कृषि मंत्रालय, इकार्डा और किसानों के साथ मिलकर कार्य करेगी। हम सब मिलकर भारत को बहुत जल्द दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाएंगे।
कृषि मंत्री एदलसिंह कंषाना ने सम्मेलन में आए सभी अतिथियों को 'एक उत्पाद-श्रेष्ठ उत्पाद' के तहत मध्यप्रदेश के जिलों के अनुपम उत्पाद भेंट किए। अतिथियों द्वारा दलहन मिशन पोर्टल का शुभारंभ किया गया और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रकाशित बुलेटिन इकॉर्डा की पुस्तक का विमोचन भी किया।
राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री द्वय रामनाथ ठाकुर एवं भागीरथ चौधरी, प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री एवं सीहोर जिले की प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर, ओडिशा के उप-मुख्यमंत्री सह कृषि मंत्री केवी सिंहदेव, उत्तरप्रदेश से मंत्री सूर्य प्रताप शाही, हरियाणा से मंत्री श्याम सिंह राणा, गुजरात से मंत्री रमेशभाई भूराभाई कटारा, छत्तीसगढ़ से मंत्री रामविचार नेताम, महाराष्ट्र से मंत्री आशीष जायसवाल, राजस्थान से मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, बिहार से मंत्री रामकृपाल यादव, इकार्डा के निदेशक शिवकुमार अग्रवाल, केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के निदेशक अविनाश लवानिया, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।
Published on:
07 Feb 2026 07:16 pm
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