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पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान के बाद मां हिंगलाज का यहां है तीसरा मंदिर,नवरात्र में क्या रहता है खास जाने

दूर दराज से पहुंचते हैं श्रद्धालु

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सीहोर

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Anil Kumar

Apr 03, 2022

नवरात्र

नवरात्र

पत्रिका के लिए अनिल मालवीय की रिपोर्ट....
सीहोर. एमपी के सीहोर जिले को मंदिरों के साथ अन्य धरोहर की वजह से पहचाना जाता है। इन्हीं में से एक दोराहा क्षेत्र के झरखेड़ा का मां हिंगलाज माता का मंदिर है। पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान, रायसेन के बाड़ी के बाद मां हिंगलाज का यह तीसरा मंदिर है। मंदिर सवा सौ साल पुराना होने के साथ इसमें 12 महीने अखंड ज्योत जलती है। यहां माता के दर्शन मात्र से ही निसंतान को संतान, दुख दर्द वालों को सुख-शांति प्राप्त होती है। इस वजह से मंदिर में हर समय श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है। नवरात्र में उनकी संख्या बढ़ जाती है।

बताया जाता है कि करीब 125 साल पहले पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान शहर से महंत गोस्वामी मां हिंगलाज की ज्योत लेकर चले थे। माता के वचन अनुसार जब भौर (सुबह) हुई तो मां हिंगलाज झरखेड़ा में विराजित हुई, तभी से मां के दरबार में ज्योत जल रही है। मंदिर के बारे में कहा जाता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से माता के दरबार में आता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। इसमें निसंतान को संतान प्राप्ति, दुखियों को सुख प्राप्ति और हर समस्या का निराकरण होता है। इस कारण दूर दराज से लोग मंदिर में माता की पूजा अर्चना करने पहुंचते हैं।

यह है गांव की खासियत
बताया जाता है कि वर्षो पहले झरखेड़ा करीमगड़ के नाम से था, जहां पिंडारे निवास करते थे। जब पुजारी माता को लेकर आएं तो पिंडारों ने उनको परेशान करना शुरू कर दिया। माता के शेर ने पिंडारों को यहां से खदेडकऱ पुजारी की रक्षा की थी। मंदिर के अंदर माता की आकर्षक प्रतिमा विराजमान है। वैसे तो मंदिर में सालभर श्रद्धज्ञलुओं के आने जान का सिलसिला रहता है, लेकिन नवरात्र में उनकी संख्या ज्यादा हो जाती है।