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बिल्डिंग परमिशन ऑनलाइन : 95 फीसदी कॉलोनी के निर्माण पर लगा ब्रेक

सीहोर शहर में इन कॉलोनी में नहीं मिल रही निर्माण की स्वीकृति...

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Sehore. City scene

Out of 303 colony in Sehore city, about 281 colony is in illegal list, construction is not getting approval in illegal colony

सीहोर. एक साल से नगर पालिका में बिल्डिंग परमिशन की प्रक्रिया ऑनलाइन होने से शहर की करीब 95 फीसदी कॉलोनी के निर्माण कार्य पर ब्रेक लग गया है।

एक साल पहले तक नगर पालिका इन कॉलोनियों में निर्माण कार्य की खूब अनुमति दे रही थी, लेकिन अब ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में अवैध कॉलोनी का विकल्प नहीं होने के कारण अनुमति नहीं मिल रही हैं। नतीजन, नगर पालिका से हर साल 750 से 850 निर्माण कार्य की परमिशन दी जाती थी, जिसकी संख्या घटकर अब महज 250 पर सिमट गई है।

जानकारी के अनुसार सीहोर नगरीय क्षेत्र में 303 कॉलोनी हैं, जिसमें से 281 कॉलोनी अवैध रूप से विकसित की गई हैं। नगरीय प्रशासन स्तर पर प्रदेशभर की अवैध कॉलोनियों को वैध करने की प्रक्रिया लंबित है।

एक तरफ अवैध कॉलोनी को वैध नहीं की जा सकी हैं और दूसरी तरफ नपा में बिल्डिंग परमिशन की प्रक्रिया के ऑनलाइन होने से अवैध कॉलोनियों में चल रहे निर्माण कार्य पर ब्रेक लग गया है, यहां के रहवासी काफी परेशान हो रहे हैं। रहवासियों के शिकायत करने के बाद भी अफसर समस्या का समाधान नहीं कर पा रहे हैं और नपा को राजस्व का अभी नुकसान हो रहा है।

पहले खूब दी अवैध कॉलोनी में निर्माण की अनुमति
नगर पालिका एक साल पहले तक शहर की 281 अवैध कॉलोनी में निर्माण के लिए खूब परमिशन दे रही थी, लेकिन जब से प्रक्रिया ऑनलाइन हो गई है तो सॉफ्टवेयर में अवैध कॉलोनी का विकल्प नहीं होने से परमिशन देना बंद हो गया है।

एक साल पहले तक अवैध कॉलोनी में निर्माण की अनुमति देने पर अफसरों का तर्क है कि अप्रैल 2019 से पहले सरकार द्वारा अवैध कॉलोनी को वैध करने बनाई गई गाइड लाइन पर ग्वालियर हाई कोर्ट से रोक थी। मामला हाई कोर्ट में लंबित होने का फायदा उठाते हुए नगरीय निकाय से अवैध कॉलोनी में ऑफलाइन खूब निर्माण की परमिशन दी गईं। अब प्रक्रिया ऑनलाइन हो गई है और हाई कोट ने भी फैसला दे दिया है तो ऑफ लाइन परमिशन पर रोक लग गई है।

कॉलोनाइजर दूर हो गए रहवासी परेशान
शहर की अवैध 281 कॉलोनी में से अधिकतर 15 से 20 साल पुरानी हैं। कुछ कॉलोनी तो ऐसी हैं जो 25 साल पहले डेवलप की गईं थी। इन कॉलोनियों को अवैध रूप से डेवलप करने के बाद कॉलोनाइजर तो गायब हो गए, लेकिन अब रहवासी परमिशन के लिए परेशान हो रहे हैं। यदि देखा जाए तो शहर की 60 फीसदी आबादी इन अवैध कॉलोनियों में ही निवास करती हैं, जहां नगर पालिका सालों से निर्माण कार्य भी कराती आ रही है।

एक नजर में शहर की स्थिति
- साल 2011 की जनगणना के हिसाब से एक लाख 35 हजार आबादी
- नगर पालिका के रिकॉर्ड के मुताबिक शहर में 25 हजार से ज्यादा माकान
- एक साल में करीब 800 निर्माण कार्य के लिए दी जाती है परमिशन
- साल 2019 में महज 250 निर्माण कार्य की सिर्फ वैध कॉलोनी में दी गई परमिशन
- अवैध कॉलोनियों में परमिशन नहीं मिलने पर भी हो रहे हैं निर्माण कार्य

नगरीय प्रशासन स्तर पर अवैध कॉलोनी को वैध करने की प्रक्रिया लंबित है। ऑनलाइन प्रक्रिया में अवैध कॉलोनी में परमिशन देने का विकल्स नहीं है। यह बात सही है कि अवैध कॉलोनी में निर्माण की परमिशन नहीं मिलने से रहवासी परेशान हैं, लेकिन स्थानीय स्तर से इसमें कुछ नहीं किया जा सकता है।
- संदीप श्रीवास्तव, सीएमओ नगर पालिका सीहोर